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महापाप की 'तंदूरी': बिहार के होटलों में सुलग रहा श्मशान का कोयला; चिताओं से हड्डियां चुनकर रेस्टोरेंट्स को सप्लाई, पटना के घाटों पर बड़ा खुलासा

पटना/बिहार. बिहार के खान-पान उद्योग से एक ऐसी घिनौनी हकीकत सामने आई है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है. दैनिक भास्कर की एक इन्वेस्टिगेशन टीम ने खुलासा किया है कि पटना के प्रमुख घाटों (बांस घाट, गुलबी घाट) से चिता की अधजली लकड़ियों और कोयले को होटल-रेस्टोरेंट्स में तंदूरी रोटी और चिकन पकाने के लिए सप्लाई किया जा रहा है. गैस संकट का फायदा उठाकर 'मौत के सौदागर' इस अपवित्र कोयले से करोड़ों का काला कारोबार कर रहे हैं.

इन्वेस्टिगेशन की 5 रोंगटे खड़े करने वाली बातें
हड्डियां छांटकर 'प्रीमियम' सप्लाई: एजेंटों के अनुसार, श्मशान से दो तरह का कोयला निकलता है. ₹600 प्रति बोरी वाला 'मिक्स कोयला' (जिसमें हड्डियां होती हैं) और 1000 प्रति बोरी वाला 'स्पेशल कोयला' जिससे हड्डियां चुनकर निकाल दी जाती हैं ताकि होटल में किसी को शक न हो.

चिकन की खुशबू में छिपती 'महक': एजेंट बिट्टू का दावा है कि चिता के कोयले से जलने पर थोड़ी महक आती है, लेकिन चिकन तंदूर और मसालों की तेज खुशबू के आगे ग्राहक को कुछ पता ही नहीं चलता.

रोजाना 400 किलो की खपत: अकेले पटना के 5 प्रमुख घाटों से हर दिन करीब 400 किलो कोयला निकाला जा रहा है. कमर्शियल गैस की किल्लत और ऊंचे दामों के कारण होटलों और लिट्टी स्टॉल्स में इसकी डिमांड अचानक बढ़ गई है.

शादियों में भारी सप्लाई: खुलासा हुआ है कि इस कोयले की सबसे ज्यादा खपत शादियों और बड़े आयोजनों में हो रही है, जहाँ भारी मात्रा में तंदूरी पकवान बनते हैं.

बिना कागजों का 'काला खेल': क्योंकि यह कोयला शवों की चिता से निकलता है, इसका कोई लीगल पेपर या बिल नहीं होता. इसे पूरी गोपनीयता और 'सेफ्टी' के साथ ऑटो और निजी गाड़ियों से होटलों तक पहुँचाया जाता है.

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