
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी भीषण राजनीतिक खींचतान के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा पार्टी के नाम और आधिकारिक चुनाव चिह्न को फ्रीज किए जाने पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए दोनों पर मिलीभगत का आरोप लगाया और इसे देश में "लोकतांत्रिक पतन का सबसे बड़ा प्रतीक" करार दिया।
"वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी"
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि देश में हर बार एक तय पैटर्न के तहत लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा:
तय पैटर्न का आरोप: भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर पहले राजनीतिक दलों में टूट कराते हैं और फिर उनका मूल चुनाव चिह्न छीन लेते हैं।
पूर्व उदाहरण: उन्होंने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में हुई टूट का हवाला देते हुए कहा कि जो खेल महाराष्ट्र में हुआ, वही अब तृणमूल कांग्रेस के साथ दोहराया जा रहा है।
जनादेश पर हमला: राहुल गांधी ने कहा, "वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी—ये सब भारत के लोकतांत्रिक पतन की पहचान बन चुके हैं। जब पूरी पार्टी चुराई जा सकती है, तो वोटों की चोरी पर कोई अचरज नहीं रह जाता।"
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने निर्वाचन आयोग को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि जिस आयोग का संवैधानिक दायित्व जनता के जनादेश की रक्षा करना है, वह जनमत को पलटने वाली ताकतों के मददगार की तरह काम कर रहा है। उन्होंने विपक्षी दलों को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी या उनकी पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी ढांचे को बचाने की साझी लड़ाई है।
आयोग का बड़ा फैसला: दोनों गुटों के लिए सिंबल फ्रीज
भारत निर्वाचन आयोग ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए विवाद के अंतिम निपटारे तक तृणमूल कांग्रेस के नाम और पार्टी सिंबल के उपयोग पर दोनों गुटों के लिए पूर्ण रोक लगा दी है। आयोग के फैसले के अनुसार:
न तो ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला मूल धड़ा और न ही ऋतब्रत बनर्जी का बागी गुट आगामी किसी भी चुनाव में 'TMC' नाम और पार्टी चिह्न का इस्तेमाल कर सकेगा।
दोनों पक्षों को अंतरिम व्यवस्था के तहत नए अस्थाई नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।
कैसे फूटी थी टीएमसी में बगावत?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद टीएमसी के भीतर अंदरूनी कलह तेज हुई, जिसकी मुख्य शुरुआत विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन विवाद से हुई। देखते ही देखते पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायक बगावत कर ऋतब्रत बनर्जी के गुट में शामिल हो गए। यह संख्या दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत आवश्यक दो-तिहाई आंकड़े से अधिक थी, जिसके आधार पर बागी गुट ने खुद को असली टीएमसी बताते हुए आयोग में नाम और निशान पर दावा ठोक दिया। दोनों गुटों की खींचतान के बीच आयोग ने यह कड़ा कदम उठाया है।
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