लखनऊ, 3 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इलाहाबाद सब-जोनल ऑफिस ने टोल प्लाजा घोटाले की चल रही जांच के तहत पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के अनुसार बुधवार को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-एनसीआर में 14 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया।
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लखनऊ, 3 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इलाहाबाद सब-जोनल ऑफिस ने टोल प्लाजा घोटाले की चल रही जांच के तहत पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के अनुसार बुधवार को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-एनसीआर में 14 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया।
ईडी की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जो मिर्जापुर के अट्रैला टोल प्लाजा और देश भर के कई अन्य टोल प्लाजा पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी से टोल वसूली से जुड़ी थी।
दरअसल, जनवरी 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अट्रैला शिव गुलाम टोल प्लाजा पर धोखाधड़ी का खुलासा किया, जहां बिना फास्टैग बैलेंस या कम बैलेंस वाले वाहनों से टोल वसूलने के लिए एक अनधिकृत मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाता था। यह अवैध ऐप नकली रसीदें बनाता था और एनएचएआई के आधिकारिक सिस्टम से वसूली की जानकारी छिपाता था, जिससे कानूनी टोल रिपोर्टिंग से बचा जाता था और अथॉरिटी को राजस्व का नुकसान होता था।
ईडी की जांच से पता चला है कि बिना फास्टैग वाले वाहनों से टोल वसूली को आसान बनाने के लिए 'मॉबडेटा' और 'एनी' नाम के अनधिकृत ऐप बनाए और इस्तेमाल किए गए थे एवं ऐसी अवैध टोल वसूली की निगरानी के लिए पोर्टल बनाए गए थे। आरोपियों से जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच से पता चला कि इस सिस्टम का इस्तेमाल लगभग 100 टोल प्लाजा पर किया गया था और डिजिटल रिकॉर्ड से करोड़ों रुपए की अनधिकृत टोल रसीदें दर्ज की गई हैं।
आगे की जांच में एनएचएआई द्वारा नियुक्त बिचौलियों और टोल वसूली करने वाली संस्थाओं की अनधिकृत ऐप के इस्तेमाल में भूमिका का पता चला है और टोल प्लाजा तथा ऐसे लोगों/संस्थाओं के एक बड़े नेटवर्क की पहचान की गई है, जिनकी और जांच की जरूरत है।
तलाशी अभियान के दौरान ईडी को लगभग 1.03 करोड़ रुपए नकद, अकाउंट बुक, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस आदि बरामद और जब्त किए गए। इसके साथ ही 8 बैंक लॉकर फ्रीज किए गए और टोल-वार वसूली और रिपोर्टिंग, बिना फास्टैग वाली वसूली, बैंक अकाउंट और वित्तीय लेन-देन, संदिग्ध बातचीत आदि से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सामग्री भी मिलीं।
--आईएएनएस
डीके/डीकेपी
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