
ग्वालियर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। अब राज्य में विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स) के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक लगेगी। हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा 'ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026' (वृक्ष प्रत्यारोपण नीति) का ड्राफ्ट पेश किया गया। कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद तैयार की गई इस प्रस्तावित नीति के तहत अब सड़क, मेट्रो, रेलवे और फ्लाईओवर जैसी बड़ी विकास परियोजनाओं के रास्ते में आने वाले पेड़ों को काटने के बजाय वैज्ञानिक और आधुनिक तरीके से दूसरी जगह प्रत्यारोपित (ट्रांसलोकेट) करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
हाई कोर्ट के निर्देश पर तैयार किए गए इस नए ड्राफ्ट में यह अनिवार्य किया गया है कि किसी भी निर्माण एजेंसी को सबसे पहले यह साबित करना होगा कि उन्होंने प्रोजेक्ट के डिजाइन में बदलाव करके पेड़ों को बचाने के सभी संभावित विकल्पों पर विचार किया है। यदि पेड़ों को हटाना बेहद अपरिहार्य (अनवॉइडेबल) हो जाता है, तो प्रभावित होने वाले कुल पेड़ों में से कम से कम 80 प्रतिशत पेड़ों का वैज्ञानिक तरीके से सफल प्रत्यारोपण करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, नीति के नियमों के मुताबिक एक साल बाद 80 प्रतिशत और तीन साल बाद 70 प्रतिशत ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों का जीवित रहना जरूरी होगा। यदि कोई एजेंसी इस लक्ष्य को पूरा करने में विफल रहती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उसे ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) करने तक की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक डिजिटल सिस्टम तैयार किया जाएगा। नीति के तहत प्रत्यारोपित किए जाने वाले सभी पेड़ों और उनके बदले लगाए जाने वाले नए पौधों की अनिवार्य रूप से जियो-टैगिंग (Geo-tagging) की जाएगी। इसके लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन डैशबोर्ड (Online Dashboard) विकसित किया जा रहा है, जिस पर पेड़ों की लाइव लोकेशन, ताजा तस्वीरें और उनके रखरखाव का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। नीति को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य स्तर पर 'ट्री ट्रांसलोकेशन अथॉरिटी' और जिला स्तर पर विशेष कमेटियों का गठन किया जाएगा, जो सीधे इस पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन मॉनिटरिंग करेंगी।
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