अगरतला, 12 सितंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में 28 सितंबर को होने वाले ग्राम समिति (विलेज कमेटी) चुनावों से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन को बड़ी बढ़त मिली है। अधिकारियों के अनुसार, भाजपा की सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) ने कुल सीटों में से करीब 34 प्रतिशत सीटें निर्विरोध जीत ली हैं, जबकि भाजपा ने लगभग 2 प्रतिशत सीटों पर बिना मुकाबले जीत दर्ज की है।
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अगरतला, 12 सितंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में 28 सितंबर को होने वाले ग्राम समिति (विलेज कमेटी) चुनावों से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन को बड़ी बढ़त मिली है। अधिकारियों के अनुसार, भाजपा की सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) ने कुल सीटों में से करीब 34 प्रतिशत सीटें निर्विरोध जीत ली हैं, जबकि भाजपा ने लगभग 2 प्रतिशत सीटों पर बिना मुकाबले जीत दर्ज की है।
त्रिपुरा राज्य निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 587 ग्राम समितियों की कुल 4,597 सीटों में से 1,557 सीटों (33.87 प्रतिशत) पर टिपरा मोथा पार्टी के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।
अधिकारी के मुताबिक, नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा ने भी 81 सीटों (1.76 प्रतिशत) पर निर्विरोध जीत हासिल की है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद अब राज्य के आठ जिलों के 52 में से 44 ब्लॉकों की 2,954 सीटों पर मतदान कराया जाएगा।
नामांकन वापसी की अंतिम तिथि के बाद टिपरा मोथा, भाजपा, माकपा (सीपीआई-एम) समेत विभिन्न दलों के 1,069 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए। इसके बाद अब चुनाव मैदान में कुल 9,820 उम्मीदवार बचे हैं।
इनमें सबसे अधिक 4,279 उम्मीदवार टिपरा मोथा पार्टी के हैं। इसके बाद सीपीआई(एम) के 2,151, भाजपा के 1,853, कांग्रेस के 425, आईपीएफटी के 356, 753 निर्दलीय और अन्य दलों के उम्मीदवार, तथा सीपीआई के 3 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।
निर्वाचन आयोग ने पहले घोषणा की थी कि टीटीएएडीसी क्षेत्र की 587 ग्राम समितियों के अंतर्गत आने वाले 2,634 निर्वाचन क्षेत्रों की 4,597 सीटों के लिए चुनाव 10 वर्ष के अंतराल के बाद 28 सितंबर को कराए जाएंगे। ये ग्राम समितियां गैर-टीटीएएडीसी क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों के समान हैं।
चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा अपने दो आदिवासी सहयोगी दलों टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीफटी) के साथ मिलकर मैदान में है। वहीं विपक्ष में सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा और कांग्रेस चुनाव लड़ रहे हैं।
इस बीच चुनाव को लेकर राज्य के विभिन्न जिलों से हिंसा और तनाव की खबरें भी सामने आई हैं।
आईपीएफटी के वरिष्ठ नेता और मंत्री शुक्ला चरण नोतिया ने आरोप लगाया कि 8 सितंबर को खोवाई जिले के हेजामारा इलाके में उनकी पार्टी के महासचिव स्वपन देबबर्मा पर "क्रूर हमला" किया गया।
नोतिया ने एक बयान में कहा कि जब देबबर्मा खोवाई गांव जा रहे थे, तब टिपरा मोथा के समर्थकों ने उन पर हमला किया और मारपीट की। उन्होंने कहा कि भाजपा, आईपीएफटी और टिपरा मोथा चुनावी गठबंधन का हिस्सा हैं, इसलिए इस तरह की घटनाएं गठबंधन की एकता की भावना को नुकसान पहुंचाती हैं।
उन्होंने राज्यभर में राजनीतिक हिंसा रोकने की अपील करते हुए कहा कि सभी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को शांति बनाए रखनी चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव संपन्न कराने में सहयोग करना चाहिए।
वहीं, सीपीआई(एम) और कांग्रेस ने भी आरोप लगाया है कि कई सीटों पर उनके उम्मीदवार हमलों, धमकियों और कथित बाधाओं के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर पाए। वाम मोर्चा के संयोजक और पूर्व मंत्री माणिक डे ने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग से शिकायत कर उचित कार्रवाई की मांग की है, लेकिन अब तक हिंसा रोकने के लिए कोई ठोस कदम दिखाई नहीं दिया है।
चुनाव से पहले सामने आए इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच अब सबकी निगाहें 28 सितंबर को होने वाले मतदान और उसके परिणामों पर टिकी हैं।
--आईएएनएस
एएमटी
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