अगरतला, 12 सितंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा के स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी की ओर से 19 अनधिकृत प्राइवेट रिहैबिलिटेशन सेंटरों को 'शो-कॉज नोटिस' जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से रविवार को बताया गया कि इन सेंटरों पर आरोप है कि वे बिना जरूरी रजिस्ट्रेशन के चल रहे थे और 'मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017' के तहत तय मानकों का पालन नहीं कर रहे थे।
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अगरतला, 12 सितंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा के स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी की ओर से 19 अनधिकृत प्राइवेट रिहैबिलिटेशन सेंटरों को 'शो-कॉज नोटिस' जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से रविवार को बताया गया कि इन सेंटरों पर आरोप है कि वे बिना जरूरी रजिस्ट्रेशन के चल रहे थे और 'मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017' के तहत तय मानकों का पालन नहीं कर रहे थे।
स्वास्थ्य विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि 9 सितंबर को दो अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इन संगठनों पर आरोप था कि वे 'मेंटल हेल्थकेयर एक्ट' के तहत बिना सही रजिस्ट्रेशन या इजाजत के मानसिक बीमारी और ड्रग की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज और रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) की सुविधाएं दे रहे थे।
पहले नोटिस में, अगरतला के उजान अभयनगर स्थित 'स्वप्ना फाउंडेशन' पर आरोप लगाया गया कि वह सक्षम अधिकारी से रजिस्ट्रेशन लिए बिना मानसिक स्वास्थ्य केंद्र या रिहैबिलिटेशन सेंटर चला रहा था। नोटिस में इस बात का भी जिक्र किया गया कि मरीजों की सेहत पर बुरा असर पड़ा है। संगठन से कहा गया है कि वह नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर अपना जवाब दे और बताए कि एक्ट के संबंधित प्रावधानों के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
अधिकारी ने यह भी चेतावनी दी कि अगर तय समय में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है या संगठन जांच में सहयोग नहीं करता है, तो उसके खिलाफ एकतरफा उचित कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, दूसरे नोटिस में, 18 अन्य संगठनों पर आरोप लगाया गया कि वे एक्ट के तहत बिना सही रजिस्ट्रेशन या इजाजत के मानसिक बीमारी और ड्रग की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज और रिहैबिलिटेशन की सुविधाएं दे रहे थे। एक्ट की धारा 65(1) के तहत, सक्षम अधिकारी से रजिस्ट्रेशन लिए बिना कोई भी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान या रिहैबिलिटेशन सेंटर चलाना गैर-कानूनी है।
इन 18 संगठनों से भी कहा गया है कि वे नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर अपना जवाब दें और बताएं कि एक्ट के संबंधित प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। अधिकारी ने चेतावनी दी कि तय समय में संतोषजनक जवाब न देने या जांच में सहयोग न करने पर संगठनों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि 'मेंटल हेल्थकेयर एक्ट' के तहत त्रिपुरा में चल रहे सभी रिहैबिलिटेशन सेंटरों के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है। साथ ही, राज्य में ऐसे सभी सेंटरों और मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को एक्ट के तहत अधिकारी द्वारा तय 12 नियमों के अनुसार काम करना जरूरी है। इन नियमों में सुरक्षा उपाय, खाने की क्वालिटी, कमरे का तय साइज, दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं, बायोमेडिकल सुरक्षा और कई अन्य जरूरी बातें शामिल हैं।
विभाग ने कहा कि कई सेंटर इन नियमों का पालन नहीं कर रहे थे, जिससे मरीजों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के उल्लंघन को लेकर चिंता पैदा हो गई है। इसलिए, जिन सेंटरों ने जरूरी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है और तय मानकों व क्वालिटी के नियमों का पालन नहीं किया है, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग ने आगे कहा कि अगर ऐसे सेंटर तय समय के अंदर सुधार के कदम नहीं उठाते हैं, तो एक्ट के तहत उनके खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
त्रिपुरा पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में एक युवक के साथ कथित मारपीट और उसकी मौत के मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एक प्राइवेट नशा-मुक्ति केंद्र का मालिक भी शामिल है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में 'स्वप्ना फाउंडेशन ड्रग डी-एडिक्शन एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर' के मालिक शुभम बिस्वास और कई स्टाफ सदस्य शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, शहाना दास भट्टाचार्जी ने 16 अगस्त को एनसीसी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति तुहिनसुभ्रा भट्टाचार्जी के साथ उस सेंटर में मारपीट की गई, जहां उन्हें 9 अगस्त को भर्ती कराया गया था। उन्हें अगरतला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
--आईएएनएस
एसडी/एएस
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