
वॉशिंगटन/नई दिल्ली. 2026 दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकतों, भारत और अमेरिका ने व्यापार के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत की है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर हुई ऐतिहासिक बातचीत के बाद भारत पर लगे भारी-भरकम टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने का बड़ा ऐलान किया है.
इस समझौते को ट्रंप की 'पीस थ्रू ट्रेड' (व्यापार के जरिए शांति) नीति की बड़ी जीत माना जा रहा है, जिसमें भारत ने रूसी तेल की निर्भरता कम कर अमेरिकी ऊर्जा बाजार की ओर कदम बढ़ाए हैं.
कैसे 50% से 18% पर आया टैरिफ?
पिछले कुछ महीनों से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर था. ट्रंप ने भारत पर दो चरणों में टैक्स लगाए थे:
25% रेसिप्रोकल टैरिफ: यह 'जैसे को तैसा' नीति के तहत लगाया गया था.
25% पेनल्टी टैरिफ: यह रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण दंड के रूप में लगाया गया था. अब स्थिति: राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी तेल खरीद से जुड़ी 25% पेनल्टी को पूरी तरह हटा दिया है और मूल टैरिफ को भी 25% से घटाकर 18% कर दिया है.
समझौते की 3 बड़ी शर्तें:
रूस से तेल की विदाई: ट्रंप के मुताबिक, पीएम मोदी रूसी तेल की खरीद बंद करने और इसके बदले अमेरिका व वेनेजुएला से आयात बढ़ाने पर राजी हो गए हैं.
$500 बिलियन की खरीदारी: भारत 'बाय अमेरिकन' नीति के तहत अमेरिका से करीब 46 लाख करोड़ रुपये ($500 Billion) के ऊर्जा (तेल, कोयला), कृषि और तकनीकी उत्पाद खरीदेगा.
जीरो टैरिफ की ओर: भारत ने भी अमेरिकी उत्पादों पर से अपने टैरिफ और व्यापारिक बाधाओं को धीरे-धीरे 'शून्य' (Zero) करने की प्रतिबद्धता जताई है.
"जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एकसाथ मिलते हैं, तो यह न केवल हमारे लोगों के लिए लाभ लाता है, बल्कि वैश्विक स्थिरता का आधार भी बनता है. इस शानदार फैसले के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का दिल से शुक्रिया." — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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