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ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामला: पूर्व जज गिरिबाला ने उकसाने के आरोपों से किया इनकार, हाईकोर्ट ने जमानत पर आदेश सुरक्षित रखा


भोपाल, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह ने सोमवार को अपनी बहू ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से कहा कि गर्भावस्था खत्म करने के ट्विशा शर्मा के फैसले पर उनकी नाराजगी को उत्पीड़न नहीं माना जा सकता।

भोपाल, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह ने सोमवार को अपनी बहू ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से कहा कि गर्भावस्था खत्म करने के ट्विशा शर्मा के फैसले पर उनकी नाराजगी को उत्पीड़न नहीं माना जा सकता।

गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके वकील ने जस्टिस अजय कुमार निरंकारी के सामने अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि वह ट्विशा शर्मा के गर्भपात (अबॉर्शन) कराने के फैसले से खुश नहीं थीं, क्योंकि उनका बेटा वकील समर्थ सिंह,और वह खुद उस बच्चे को चाहते थे।

उन्होंने कहा कि गिरिबाला सिंह ने न तो शर्मा को गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया और न ही उनके साथ कोई क्रूरता की।

वकील ने कहा, "सास इसलिए बहुत परेशान थीं, क्योंकि बहू उनकी बात नहीं सुन रही थी और उसने गर्भपात करवा लिया। सास की प्रतिक्रिया केवल गुस्से में थी और बाद में उन्होंने अपनी बातों के लिए माफी भी मांग ली थी।"

उन चैट का जिक्र करते हुए, जिनमें गिरिबाला सिंहने गर्भपात को लेकर ट्विशा शर्मा को 'कातिल' कहा था, वकील ने तर्क दिया कि ये शब्द आवेश में कहे गए थे। इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने ट्विशा शर्मा को अपनी जान देने के लिए उकसाया था।

उन्होंने कहा कि मामले में जिन चैट का हवाला दिया गया है, वे गिरबाला सिंह की बजाय उनके बेटे समर्थ सिंह के बर्ताव की ओर इशारा करते हैं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि शर्मा को उनके ससुराल में कैद करके नहीं रखा गया था; बल्कि वह दिल्ली जाने की योजना बना रही थीं, जहां उन्होंने नौकरी के लिए आवेदन भी किया था।

गिरिबाला सिंह के वकील ने अपनी दलीलें पूरी करते हुए कहा कि अपराधों की प्रकृति और लागू कानूनी प्रावधानों को देखते हुए उनकी मुवक्किल की जमानत पर विचार किया जाना चाहिए।

जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने तर्क दिया कि जांच लंबित रहने के दौरान गिरिबाला सिंह गवाहों और सबूतों को प्रभावित कर सकती हैं।

यह मामला नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है। उनकी मुलाकात एक डेटिंग ऐप के जरिए भोपाल के वकील पूर्व जज गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह से हुई थी, जो हैं।

शादी के महज पांच महीने बाद, 12 मई को शर्मा अपने ससुराल (भोपाल) में फंदे से लटकी हुई पाई गईं। उनके परिवार ने पति और ससुराल वालों पर घरेलू हिंसा करने और दहेज की मांग को लेकर परेशान करने का आरोप लगाया है।

कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता और दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की पूर्व अध्यक्ष गिरिबाला सिंह को शुरुआत में एक सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल गई थी।

बाद में, राज्य सरकार और शर्मा के परिवार द्वारा इस आदेश को चुनौती दिए जाने पर उच्च न्यायालय ने यह राहत रद्द कर दी। जमानत की ताजा अर्जी पर उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार है।

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी

Date & Time : 2026-10-26 21:25:03

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