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मध्य प्रदेश में दिवाली तक लागू हो सकता है UCC, मुख्यमंत्री ने दिए ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश

भोपाल. मध्य प्रदेश की सियासत में 'समान नागरिक संहिता' (UCC) को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में इसे अमलीजामा पहनाने के लिए सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार का लक्ष्य है कि इस साल दिवाली तक प्रदेश में UCC कानून प्रभावी हो जाए। इसके लिए गृह विभाग को अल्टीमेटम देते हुए अगले 6 महीनों के भीतर विधेयक का अंतिम मसौदा (Draft) तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाल ही में नवभारतटाइम्स.कॉम द्वारा उठाए गए सवालों के बाद सरकार की इस सक्रियता को बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि मध्य प्रदेश का UCC कानून बेहतरीन मॉडलों पर आधारित होगा। इसके लिए अधिकारियों को उत्तराखंड और मार्च 2026 में लागू हुए गुजरात के कानूनों का गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार जल्द ही एक हाई-लेवल पैनल का गठन करेगी, जिसमें कानूनविदों के साथ-साथ विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा ताकि सर्वसम्मति बनाई जा सके। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए 'एक देश, एक विधान' का होना समय की मांग है।

हालांकि, इस फैसले पर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। विपक्ष ने सरकार की जल्दबाजी पर आपत्ति जताते हुए इसे सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा बताया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि सरकार को सभी वर्गों को विश्वास में लेना चाहिए, अन्यथा बिना संवाद के कानून थोपना विवाद पैदा कर सकता है। वहीं, सत्ता पक्ष का तर्क है कि यह किसी धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जिससे विशेषकर महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी।

आम जनता पर क्या होगा असर? UCC लागू होने से नागरिकों के व्यक्तिगत जीवन से जुड़े कई नियमों में बड़ा बदलाव आएगा:

  • विवाह और तलाक: शादी का पंजीकरण (Registration) अनिवार्य होगा और तलाक के नियम सभी धर्मों के लिए एक समान हो जाएंगे।

  • संपत्ति का अधिकार: पैतृक संपत्ति में बेटियों को बेटों के बराबर कानूनी अधिकार मिलेगा।

  • बहुविवाह पर रोक: उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी बहुविवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध लगने की प्रबल संभावना है।

  • गोद लेना और भरण-पोषण: बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया और गुजारा भत्ता (Alimony) के नियम भी सभी के लिए एक जैसे होंगे।

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