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उत्तर प्रदेश के इस मंदिर में विराजमान दिव्य शक्ति, सिद्धपीठ के दर्शन मात्र से दूर होते हैं बड़े से बड़े कष्ट

हापुड़, 23 फरवरी (आईएएनएस)। देश के कई हिस्सों में आदिशक्ति के कई मंदिर हैं, जो श्रद्धा, विश्वास, भक्ति के साथ ही सुंदर वास्तुकला की कथा कहते हैं। ये पत्थरों से बने केवल इमारत नहीं, बल्कि भक्त और ईश्वर की अनोखे रिश्ते को भी उजागर करते हैं। इन सारी चीजों को खुद में समेटे एक ऐसा ही दिव्य मंदिर उत्तर प्रदेश के जिला हापुड़ में है, जो आदि शक्ति को समर्पित है।

हापुड़, 23 फरवरी (आईएएनएस)। देश के कई हिस्सों में आदिशक्ति के कई मंदिर हैं, जो श्रद्धा, विश्वास, भक्ति के साथ ही सुंदर वास्तुकला की कथा कहते हैं। ये पत्थरों से बने केवल इमारत नहीं, बल्कि भक्त और ईश्वर की अनोखे रिश्ते को भी उजागर करते हैं। इन सारी चीजों को खुद में समेटे एक ऐसा ही दिव्य मंदिर उत्तर प्रदेश के जिला हापुड़ में है, जो आदि शक्ति को समर्पित है।

उत्तर प्रदेश का पर्यटन विभाग माता के इस मंदिर के विषय में विस्तार से जानकारी देता है। पर्यटन विभाग के अनुसार, हापुड़ में स्थित श्री चंडी माता मंदिर आस्था, शक्ति और भक्ति का एक प्रमुख पावन धाम है। यह मंदिर मां चंडी को समर्पित है, जो मां दुर्गा का एक उग्र और शक्तिशाली रूप मानी जाती हैं।

स्थानीय जनश्रुतियों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर को पांडवकालीन परंपरा से जोड़ा जाता है और इसे प्राचीन सिद्धपीठ के रूप में पूजा जाता है।

भक्तों का विश्वास है कि यहां मां चंडी का दिव्य स्वरूप विराजमान है, जहां मात्र दर्शन से बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही शांत और पवित्र वातावरण मन को तुरंत शांति प्रदान करता है। यहां मां चंडी का स्वरूप करुणा और सामर्थ्य का अनोखा संतुलन दिखाता है। मां का रूप महिषासुर मर्दिनी जैसा माना जाता है, जहां वह असुरों का संहार करती हुई दिखाई देती हैं। मंदिर परिसर में नौ देवियां भी विराजमान हैं, जो शक्ति के विभिन्न रूपों का प्रतीक हैं।

भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से मां के चरणों में शीश नवाने पर अशांति दूर होती है, भय, रोग-शोक, शत्रुओं का नाश होता है और जीवन की हर समस्या का समाधान मिलता है। यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि आत्मिक जुड़ाव और आंतरिक शांति का केंद्र है।

मंदिर की कुछ खास विशेषताएं इसे और भी अनोखा बनाती हैं। यहां माता के विश्राम के लिए चांदी का पलंग लगा हुआ है, जो भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक है। साथ ही, मंदिर में माता का अभिषेक किया जाता है, जो उनकी दिव्यता को और बढ़ाता है। दिन भर में पांच बार आरती की परंपरा है, जिसमें भक्त बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

यह सिद्धपीठ नवरात्रि, दुर्गा पूजा और अन्य शक्ति उपासना के अवसरों पर विशेष रूप से चमकता है, जब हजारों भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं।

मंदिर हापुड़ के किसनगंज रोड पर स्थित है, जो पक्का बाग क्षेत्र के पास है। यहां पहुंचना बहुत आसान है। हापुड़ शहर से कुछ ही किलोमीटर दूर होने के कारण स्थानीय बस, ऑटो या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। हापुड़ रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से भी निकट है, जिससे दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा होती है।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

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