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'वह भविष्य में और अच्छा करे', यशवर्धन सिंह के इंडिया अंडर-19 टीम का कप्तान बनने पर माता-पिता ने जताई खुशी


ग्वालियर, 12 जून (आईएएनएस)। हर युवा क्रिकेटर का सपना देश के लिए खेलना होता है। अंडर-19 टीम में जगह बनाना, देश के लिए खेलने के सपने को पूरा करने की पहली सीढ़ी है। ग्वालियर के यशवर्धन सिंह चौहान को श्रीलंका के खिलाफ होने वाली वनडे और दो चार-दिवसीय मैचों की सीरीज के लिए न सिर्फ भारत की अंडर-19 टीम में जगह दी गई है, बल्कि उन्हें टीम का कप्तान भी बना दिया गया है। यशवर्धन सिंह चौहान को भारतीय टीम में जगह मिलने और उन्हें कप्तान बनाए जाने से उनके घर जश्न का माहौल है।

ग्वालियर, 12 जून (आईएएनएस)। हर युवा क्रिकेटर का सपना देश के लिए खेलना होता है। अंडर-19 टीम में जगह बनाना, देश के लिए खेलने के सपने को पूरा करने की पहली सीढ़ी है। ग्वालियर के यशवर्धन सिंह चौहान को श्रीलंका के खिलाफ होने वाली वनडे और दो चार-दिवसीय मैचों की सीरीज के लिए न सिर्फ भारत की अंडर-19 टीम में जगह दी गई है, बल्कि उन्हें टीम का कप्तान भी बना दिया गया है। यशवर्धन सिंह चौहान को भारतीय टीम में जगह मिलने और उन्हें कप्तान बनाए जाने से उनके घर जश्न का माहौल है।

अंडर-19 टीम का कप्तान बनाए जाने पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए यशवर्धन सिंह चौहान ने आईएएनएस से कहा, "मैंने छह या सात साल की उम्र में कोच लवकेश सर के मार्गदर्शन में तानसेन क्रिकेट एकेडमी में प्रशिक्षण शुरू की थी। मेरे कोच, माता-पिता, परिवार, दोस्तों और आस-पास के सभी लोगों ने इस पूरे सफर में मेरा साथ दिया है। उनके सहयोग से ही यह कामयाबी मुमकिन हुई है। 4 जुलाई से श्रीलंका में हमारे मैच हैं, जिसमें तीन वन-डे मैच और दो मल्टी-डे मैच शामिल हैं। मैं अपने देश की कप्तानी करने का मौके मिलने पर उत्साहित हूं। यह बहुत गर्व की बात है। मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगा।"

यशवर्धन की मां रीना चौहान ने कहा, "जब बच्चे छोटे होते हैं तो माता-पिता को संघर्ष करना पड़ता है। उनका मार्गदर्शन करना पड़ता है। हम उसे हिम्मत देते रहे और बताते रहे कि क्या करना है और कैसे आगे बढ़ना है। उसने बहुत अच्छा किया है। हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वह भविष्य में और भी कामयाबी हासिल करे। हम बहुत खुश थे जब हमें उसके अंडर-19 टीम में जगह मिलने की खबर मिली।"

पिता अनामी चौहान ने कहा, "हम बहुत खुश और गर्व महसूस कर रहे हैं। बहुत अच्छा लग रहा है कि हमने जो सपना देखा था, वह सच हो गया है। हमें उम्मीद है कि वह आगे भी तरक्की करता रहेगा और भविष्य में और भी बड़ी सफलता हासिल करेगा। उसने लगभग सात या आठ साल की उम्र में क्लब मैचों में खेलना और प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था, और तब से, ऐसा लग रहा था कि वह आगे चलकर ऊंचे स्तर पर खेलेगा।"

कोच लवकेश चौधरी ने कहा, "जब वह छह या सात साल का था, तो उसके पिता उसे मेरे पास लाए थे। वह शुरू से प्रतिभाशाली बच्चा रहा है। दूसरे बच्चों की तुलना में, उसने जल्दी सीखा और उसमें बहुत उम्मीदें थीं। वह पहले डिवीजन टीम, फिर राज्य टीम का कप्तान बना, और अब वह भारत अंडर-19 टीम का कप्तान बना है। यह हम सभी के लिए बहुत गर्व की बात है।"

--आईएएनएस

पीएके

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