
सक्ती: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट हादसा मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित प्रबंधन के 8 से 10 वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की है। एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। डबरा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत यह मामला दर्ज किया गया है।
यह दुखद घटना मंगलवार 14 अप्रैल को सिंघीतराई स्थित पावर प्लांट में हुई थी। प्लांट के बॉयलर में हुए भीषण विस्फोट की चपेट में कुल 35 लोग आए थे। इस वेदांता पावर प्लांट हादसा में अब तक 20 श्रमिकों की मौत हो चुकी है। जबकि 15 गंभीर रूप से घायल श्रमिकों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने घटनास्थल का निरीक्षण कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
सक्ती एसपी के अनुसार, वर्तमान में बीएनएस की धारा 106, 289, 3 और 5 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस अब औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग, एफएसएल और तकनीकी विशेषज्ञों की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इन रिपोर्टों के आधार पर मामले में अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी व्यक्ति संलिप्त पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
हादसे के बाद राजनीति भी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और दीपक बैज के नेतृत्व में कांग्रेस की जांच समिति सक्ती पहुंची। समिति ने आरोप लगाया कि क्षमता से अधिक बिजली उत्पादन के दबाव के कारण यह विस्फोट हुआ। मुआवजे के तौर पर कंपनी ने प्रत्येक मृतक परिवार को 35 लाख रुपये और एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया है। वहीं सरकार और पीएम राहत कोष से भी आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है।
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