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वी. शांताराम की बायोपिक में सिद्धांत चतुर्वेदी बनेंगे महान फिल्मकार, किरण शांताराम बोले- 'इस किरदार के लिए बिल्कुल सही चुनाव'

मुंबई, 13 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमा का इतिहास कई ऐसे महान कलाकारों और फिल्मकारों से भरा हुआ है, जिन्होंने अपनी सोच, मेहनत और रचनात्मकता से इस इंडस्ट्री को नई पहचान दी। उन्हीं महान हस्तियों में से एक थे दिग्गज फिल्मकार वी. शांताराम। उनके जीवन और संघर्ष की कहानी को लेकर फिल्म बनाई जा रही है, जिसमें उनका किरदार अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी निभाएंगे।

मुंबई, 13 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमा का इतिहास कई ऐसे महान कलाकारों और फिल्मकारों से भरा हुआ है, जिन्होंने अपनी सोच, मेहनत और रचनात्मकता से इस इंडस्ट्री को नई पहचान दी। उन्हीं महान हस्तियों में से एक थे दिग्गज फिल्मकार वी. शांताराम। उनके जीवन और संघर्ष की कहानी को लेकर फिल्म बनाई जा रही है, जिसमें उनका किरदार अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी निभाएंगे।

इस बीच में एक खास कार्यक्रम में वी. शांताराम के बेटे किरण शांताराम ने सिद्धांत को सम्मानित किया और बायोपिक के लिए उन्हें सही चुनाव बताया।

कार्यक्रम में दर्शकों को संबोधित करते हुए किरण शांताराम ने कहा, ''मेरे पिता के जीवन पर बायोपिक बनाना बेहद भावनात्मक और गर्व का विषय है, क्योंकि इसके जरिए नई पीढ़ी को यह समझने का मौका मिलेगा कि भारतीय सिनेमा को आकार देने में वी. शांताराम का कितना बड़ा योगदान रहा है। मेरा यकीन है कि उनके किरदार को निभाने के लिए सिद्धांत चतुर्वेदी एकदम सही चुनाव हैं।''

उन्होंने बताया कि यह फिल्म एक खास मौके पर रिलीज की जाएगी।

दरअसल, 18 नवंबर 2026 को वी. शांताराम की 125वीं जयंती मनाई जाएगी और उसी दिन इस बायोपिक को दर्शकों के सामने लाने की योजना है।

किरण शांताराम ने कहा, ''यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास को याद करने और उस विरासत को सम्मान देने का एक प्रयास है। मेरे पिता ने ऐसे समय में फिल्मों में प्रयोग किए, जब सिनेमा अपनी शुरुआती अवस्था में था। मूक फिल्मों से लेकर बोलती और रंगीन फिल्मों के दौर तक, उन्होंने हर समय नई तकनीक और नई कहानियों के साथ काम किया।''

वी. शांताराम को भारतीय सिनेमा का एक दूरदर्शी फिल्मकार माना जाता है। उन्होंने कई ऐसी फिल्में बनाईं, जो आज भी क्लासिक मानी जाती हैं। उनकी फिल्मों में सामाजिक मुद्दों, संगीत और कला का अनोखा मेल देखने को मिलता था। उनकी प्रसिद्ध फिल्मों में 'दो आंखें बारह हाथ', 'नवरंग' और 'झनक झनक पायल बाजे' जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज में बदलाव का संदेश भी दिया। यही वजह है कि वी. शांताराम को भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली और प्रयोगधर्मी फिल्मकारों में गिना जाता है।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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