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विदेश सचिव मिस्री रूस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में हुए शामिल, बोले- दोनों देश आपसी समझ बढ़ाने में करते हैं मदद


नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रूसी फेडरेशन के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने इस मौके पर रूसी फेडरेशन को बधाई दी और भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को फिर से कन्फर्म किया।

नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रूसी फेडरेशन के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने इस मौके पर रूसी फेडरेशन को बधाई दी और भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को फिर से कन्फर्म किया।

समारोह में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, "आप सभी के साथ जुड़ने और भारत सरकार की ओर से, कल 12 जून को मनाए जाने वाले रूसी फेडरेशन के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर हमारे रूसी साथियों को बधाई और शुभकामनाएं देने का यह मौका पाकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। मुझे याद है कि मैं पिछले साल भी यहां था और मैं सच में वापस आकर बहुत खुश हूं। भारत और रूस के बीच एक खास संबंध है जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है।"

उन्होंने कहा कि हमारी खास रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ सालों में और मजबूत हुई है और इसने हमारे दोनों देशों के लिए अच्छा काम किया है। हम इस संबंध को महत्व देते हैं और लगातार ऊंचे स्तर पर होने वाले द्विपक्षीय एक्सचेंज इस बात का सबूत हैं। हमारे दोनों देशों के बीच भरोसा और सम्मान एक-दूसरे के खास हितों और संवेदनशीलता के बारे में हमारी आपसी समझ को बढ़ाने में मदद करते हैं। हमारे द्विपक्षीय संबंधों की पहचान कई क्षेत्रों में गहरे सहयोग से हुई है।

विदेश सचिव ने कहा कि भू-राजनीतिक माहौल में बढ़ते तनाव के बीच भारत-रूस के संबंध हमारे आपसी हितों को आगे बढ़ाने के लिए स्थिरता का सहारा हैं। पिछले दिसंबर में, राष्ट्रपति पुतिन 23वें भारत-रूस सालाना समिट के लिए भारत के सरकारी दौरे पर आए थे। यह दौरा हमारे संबंधों में एक अहम पड़ाव था।

विदेश सचिव ने कहा, "हमने कई एमओयू और समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आर्कटिक समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ ही अकादमिक सहयोग, आर्थिक सहयोग और स्किल्ड लेबर मोबिलिटी भी शामिल है। पारंपरिक क्षेत्र में सहयोग को गहरा करके और सहयोग के नए क्षेत्रों की खोज करके अपनी आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकता है।"

उन्होंने कहा कि लगातार दो वित्तीय वर्ष में दोनों देशों के बीच व्यापार 60 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है और हमारे नेताओं ने इसे 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का बड़ा टारगेट रखा है। हमारा दोनों देशों का रक्षा सहयोग, साथ ही सिविल, न्यूक्लियर और स्पेस क्षेत्र में हमारा सहयोग भी ठीक-ठाक चल रहा है। स्किल मोबिलिटी हमारे आर्थिक सहयोग फ्रेमवर्क में एक जरूरी स्तंभ बनकर उभरा है, जिसमें भारत का बड़ा प्रोफेशनल टैलेंट पूल रूस की स्किल्ड लोगों की नई जरूरतों को पूरा कर सकता है। दोनों देश नए कनेक्टिविटी इनिशिएटिव पर भी काम कर रहे हैं, जो हमारे आर्थिक सहयोग के पूरे पोटेंशियल को अनलॉक करने के लिए जरूरी हैं।

--आईएएनएस

केके/डीएससी

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