
भोपाल। मध्य प्रदेश में बच्चों के पोषण स्तर में सुधार और कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए महिला एवं बाल विकास (WCD) विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर निगरानी तेज कर दी गई है। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव जी.वी. रश्मि ने शुक्रवार को विदिशा जिले का सघन दौरा किया। उन्होंने जिले के विभिन्न सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों, ग्यारसपुर स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) और सामुदायिक रसोई का औचक निरीक्षण कर पोषण व्यवस्थाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छता मानकों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया।
भ्रमण के दौरान विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता भी उनके साथ मौजूद रहे और उन्होंने जिले में संचालित बाल विकास व पोषण योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी साझा की।

सचिव जी.वी. रश्मि ने ग्राम कुंआखेड़ी स्थित सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र का जायजा लेकर बच्चों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक खिलौनों, लर्निंग टूल्स, उपस्थिति और पोषण आहार वितरण की समीक्षा की। इसके उपरांत उन्होंने विदिशा ग्रामीण परियोजना अंतर्गत ग्राम खरी तथा ग्यारसपुर परियोजना के अटारीखेजड़ा (क्रमांक-2 व 3) और मानोरा क्रमांक-2 आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया।
ग्यारसपुर स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) के भ्रमण के दौरान सचिव ने अतिगंभीर कुपोषित (SAM) बच्चों के चिकित्सीय उपचार, विशेष आहार चार्ट और रिकवरी रेट की समीक्षा की। उन्होंने वहां भर्ती बच्चों की माताओं से सीधा संवाद कर मिलने वाली सुविधाओं का फीडबैक लिया। रश्मि ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि डिस्चार्ज होने के बाद भी बच्चों की निरंतर फॉलो-अप मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि वे दोबारा कुपोषण के चक्र में न फंसें।

दौरे के दौरान सचिव ने ग्यारसपुर में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से लक्ष्मी स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित आधुनिक सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) का निरीक्षण किया। उन्होंने भोजन निर्माण की स्वच्छता, पैकेजिंग और आंगनबाड़ी केंद्रों तक सुरक्षित वितरण की पूरी प्रक्रिया को देखा।
रसोई में बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे पौष्टिक पोहे की गुणवत्ता परखने के लिए सचिव जी.वी. रश्मि और कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने स्वयं उसे चखा। उन्होंने समूह की दीदियों से भोजन में प्रोटीन, विटामिन्स और स्थानीय मोटे अनाजों (मिलेट्स) के समावेश पर चर्चा की। सचिव ने कहा कि सामुदायिक रसोई मॉडल से जहां एक ओर नौनिहालों को गर्म व ताजा पौष्टिक आहार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर स्व-सहायता समूह की महिलाओं को स्थायी आजीविका व सशक्तिकरण का संबल मिल रहा है।

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