नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत में बिलियर्ड्स के खेल का जब जिक्र किया जाता है तो हर किसी की जुबान पर सबसे पहले पंकज आडवाणी का नाम आता है। हालांकि, इस खेल को भारत में पहचान दिलाने वाले खिलाड़ी विल्सन जोन्स रहे। उन्होंने अपने करियर में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं।
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नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत में बिलियर्ड्स के खेल का जब जिक्र किया जाता है तो हर किसी की जुबान पर सबसे पहले पंकज आडवाणी का नाम आता है। हालांकि, इस खेल को भारत में पहचान दिलाने वाले खिलाड़ी विल्सन जोन्स रहे। उन्होंने अपने करियर में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं।
विल्सन जोन्स को शुरुआत से ही खेलों से खास लगाव था। वह हॉकी और क्रिकेट खेलने के साथ-साथ कंचे खेलने में भी काफी माहिर थे। वह खिड़की से अपने अंकल को बिलियर्ड्स का खेल खेलते हुए देखा करते थे और धीरे-धीरे उनकी इस खेल में दिलचस्पी बढ़ने लगी। 17 साल की उम्र में विल्सन ने बिलियर्ड्स खेलना शुरू किया और इस खेल में रमते चले गए। विल्सन दिन के समय में फैक्ट्री में काम किया करते थे और शाम में बिलियर्ड्स खेलते थे।
साल 1949 में विल्सन पहली बार नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेना पहुंचे, लेकिन तब उन्हें टी.जे सेल्वाराज के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, वह ठीक एक साल बाद यानी 1950 में नेशनल चैंपियन बने। उन्होंने सेल्वाराज को ही शिकस्त देकर इस खिताब को अपने नाम किया। वह अपने करियर में 12 बार नेशनल चैंपियन बने।
लगातार दमदार खेल के बूते विल्सन को विश्व चैंपियनशिप में भी अपनी काबिलियत दिखाने का मौका मिला। 1951, 1952 और 1954 में नाकामी के बाद विल्सन ने 1958 में हुई विश्व चैंपियनशिप में दमदार प्रदर्शन किया और पहली बार इस खिताब पर कब्जा करने में सफल रहे। वह बिलियर्डस में विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।
इसके बाद 1962 में विल्सन जोन्स ने एक बार फिर विश्व चैंपियनशिप में अपने शानदार प्रदर्शन से सुर्खियां बटोरीं, लेकिन वह फाइनल मुकाबले में हार गए। 1964 में विल्सन ने खिताबी मुकाबले में कोई गलती नहीं की और दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का तमगा हासिल किया। 1967 में नेशनल चैंपियनशिप जीतने के बाद विल्सन ने इस खेल को बतौर खिलाड़ी अलविदा कह दिया। इसके बाद उन्होंने कोचिंग का रुख किया और ओम अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल और अशोक शांडिल्य जैसे खिलाड़ियों को इस खेल की बारीकियां सिखाईं। भारतीय सरकार से उन्हें 1962 में 'अर्जुन पुरस्कार', 1965 में पद्म श्री, 1990 में 'महाराष्ट्र गौरव पुरस्कार' और 1996 में 'द्रोणाचार्य पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। विल्सन जोन्स का निधन 5 अक्टूबर, 2003 को हुआ।
--आईएएनएस
एसएम/डीकेपी
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