Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

विश्व पशु कल्याण दिवस: 1925 से शुरू हुई बेजुबानों के हक की लड़ाई


नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। हर साल 4 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व पशु कल्याण दिवस मनाया जाता है। भारत में इसे पशु कल्याण दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि बेजुबान प्राणियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी और करुणा का प्रतीक है।

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। हर साल 4 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व पशु कल्याण दिवस मनाया जाता है। भारत में इसे पशु कल्याण दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि बेजुबान प्राणियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी और करुणा का प्रतीक है।

इस दिवस की शुरुआत 1925 में जर्मनी के बर्लिन में हुई थी। एक प्रसिद्ध लेखक और पशु प्रेमी हाइनरिक जिम्मरमैन ने पहली बार 24 मार्च 1925 को इस दिन को मनाया था। बाद में 1929 से इसे 4 अक्टूबर को मनाया जाने लगा। 4 अक्टूबर को चुनने के पीछे एक खास वजह है—यह दिन संत फ्रांसिस ऑफ असीसी का पर्व है, जिन्हें पशु-पक्षियों का संरक्षक संत माना जाता है। 1931 में इटली के फ्लोरेंस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पशु संरक्षण सम्मेलन में इसे आधिकारिक तौर पर विश्व पशु कल्याण दिवस घोषित किया गया।

इसका मुख्य उद्देश्य है—पशुओं के अधिकारों, उनकी सुरक्षा, उनके संरक्षण और उनके प्रति होने वाली क्रूरता को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाना।

आज इंसान की तरक्की की कीमत सबसे ज्यादा पशु चुका रहे हैं। जंगलों की अंधाधुंध कटाई से उनके घर उजड़ रहे हैं, शहरीकरण से उनका प्राकृतिक आवास खत्म हो रहा है। सड़कों पर प्लास्टिक खाकर मरती गायें, क्रूरता का शिकार होते कुत्ते, तस्करी के लिए मारे जाते हाथी और प्रयोगशालाओं में दर्द सहते जानवर—ये सभी सवाल खड़ा करते हैं कि क्या हम सच में सभ्य समाज हैं?

भारत में तो पशुओं का विशेष महत्व है। यहां गाय को माता, हाथी को गणेश और नाग को शिव का प्रतीक माना जाता है। हमारे वेदों में 'अहिंसा परमो धर्मः' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' का संदेश सभी प्राणियों के लिए है।

इस दिन देशभर में पशु कल्याण से जुड़ी संस्थाएं, गौशालाएं और एनजीओ जागरूकता रैली, निशुल्क पशु चिकित्सा शिविर, टीकाकरण अभियान और गोष्ठियां आयोजित करती हैं। स्कूल-कॉलेजों में बच्चों को पशुओं के प्रति संवेदनशील बनने की शिक्षा दी जाती है। सरकार भी पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 जैसे कानूनों के बारे में लोगों को जागरूक करती है।

--आईएएनएस

केके/डीकेपी

Date & Time : 2026-10-04 00:00:02

Share:

Leave A Reviews

Related News