Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

यदि आवश्यकता पड़ी तो ईरान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती भी संभव : ट्रंप

न्यूयॉर्क, 3 मार्च (आईएएनएस)। दुनिया में इस वक्त काफी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशों में युद्ध में उलझने के अपने पहले के रुख से अलग संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि “यदि आवश्यकता पड़ी” तो वह ईरान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं करते।

न्यूयॉर्क, 3 मार्च (आईएएनएस)। दुनिया में इस वक्त काफी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशों में युद्ध में उलझने के अपने पहले के रुख से अलग संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि “यदि आवश्यकता पड़ी” तो वह ईरान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं करते।

उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया, ”जैसा कि हर राष्ट्रपति कहता है, ‘जमीन पर कोई सैनिक नहीं होगा।’ मैं ऐसा नहीं कहता।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर उनकी जरूरत हो तो सैनिकों को ग्राउंड पर भेजा जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसकी जरूरत नहीं होगी।

ताजा हालात को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणी से पहले सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी है कि सोमवार तक अमेरिकी सेना के चार सदस्य मारे गए हैं।

शनिवार सुबह ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने की घोषणा करते समय उन्होंने अमेरिकी सैनिकों को नुकसान होने की संभावना का अंदाजा लगाया था। वीडियो घोषणा में उन्होंने कहा, “ईरानी शासन मारना चाहता है। साहसी अमेरिकी नायकों की जान जा सकती है, और हमारे सैनिक हताहत हो सकते हैं; युद्ध में अक्सर ऐसा होता है।”

ट्रंप ने सोमवार को पब्लिश हुए इंटरव्यू में न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी “तय ​​समय से बहुत आगे” चल रहा है और “बहुत तेजी से खत्म होने वाला है।" उन्होंने कहा कि ईरान के नेतृत्व को खत्म करने में चार हफ्ते लगने की उम्मीद थी, लेकिन 49 नेता “एक दिन में” मारे गए।​ मारे गए लोगों में ईरान के सुप्रीम शासक अयातुल्लाह अली खामेनेई भी शामिल थे।

लेकिन, सोमवार को ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी चार से पांच हफ्ते तक चलेगा, लेकिन अगर यह "इससे कहीं ज्यादा लंबा चलना पड़ा," तो वह तैयार हैं। संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के स्थायी प्रतिनिधि डैनी डैनन ने कहा कि इसमें जितना समय लगेगा, लगेगा।

विदेशों में अमेरिका की कई लड़ाइयों में नाकामी के बाद, अमेरिकी नागरिक उलझनों से सावधान हैं। रॉयटर्स-आईपीएसओएस पोल में यह साफ तौर पर दिखा। रॉयटर्स-आईपीएसओएस पोल में शामिल सिर्फ 27 फीसदी लोगों ने ईरान पर हमले का समर्थन किया, 43 फीसदी फैसले से सहमत नहीं थे और 13 फीसदी इस चीज को लेकर निश्चित नहीं थे।

ट्रंप ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया, “मुझे पोलिंग की परवाह नहीं है। मुझे सही काम करना है। मुझे लगता है कि लोग असल में जो हो रहा है, उससे बहुत प्रभावित हैं।”

उन्होंने इशारा किया कि वह एक “साइलेंट मेजॉरिटी” पर निर्भर थे जो उनके कहे अनुसार “असली पोल” में दिखेगी।

--आईएएनएस

केके/एएस

Share:

Leave A Reviews

Related News