नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्रालय ने ब्रह्मोस के फायर कंट्रोल सिस्टम व लॉन्चर की खरीद के लिए मंगलवार को एक बड़ा करार किया है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 661.50 करोड़ रुपए में यह डील की गई है। यह भारतीय नौसेना की समुद्री मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह समझौता ‘भारतीय खरीद, भारतीय रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित’ श्रेणी के तहत किया गया है।
![]()
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्रालय ने ब्रह्मोस के फायर कंट्रोल सिस्टम व लॉन्चर की खरीद के लिए मंगलवार को एक बड़ा करार किया है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 661.50 करोड़ रुपए में यह डील की गई है। यह भारतीय नौसेना की समुद्री मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह समझौता ‘भारतीय खरीद, भारतीय रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित’ श्रेणी के तहत किया गया है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस परियोजना के जरिए नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर तैनात ब्रह्मोस प्रणाली को और सक्षम बनाने पर फोकस किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा। इससे देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ भारतीय उद्योगों की भागीदारी भी बढ़ेगी।
परियोजना में कई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के शामिल होने की भी उम्मीद है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्नत सैन्य तकनीक से जुड़े उपकरणों के निर्माण में घरेलू उद्योगों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना अगले तीन वर्षों की अवधि में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी।
गौरतलब है कि ब्रह्मोस प्रणाली भारतीय नौसेना के प्रमुख सतह से सतह पर मार करने वाले प्रक्षेपास्त्र तंत्र के रूप में विभिन्न अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर तैनात है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी अत्यधिक तेज गति और सटीक निशाना लगाने की क्षमता है। यह प्रणाली लंबी दूरी से समुद्री और जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। यानी समुद्र में तैनात भारतीय युद्धपोत जरूरत पड़ने पर दूर स्थित लक्ष्य पर तेज और सटीक प्रहार कर सकते हैं।
नए अग्नि नियंत्रण तंत्र और प्रक्षेपकों की खरीद से नौसेना के युद्धपोतों की आक्रामक क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ स्वदेशी रक्षा तकनीक पर भी लगातार जोर दे रहा है। ऐसे में 661.50 करोड़ रुपए का यह रक्षा समझौता सिर्फ नए उपकरणों की खरीद नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और नौसेना की भविष्य की युद्धक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
--आईएएनएस
जीसीबी/पीएम
Leave A Reviews