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यूएन चीफ ने पिल्लै के नोबेल पुरस्कार को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के रक्षकों के लिए बताया 'सम्मान'


संयुक्त राष्ट्र, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। एक तरफ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को भारतीय मूल की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त नवानेथेम नावी पिल्लै को नोबेल पुरस्कार मिलने की आलोचना की। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, विधि के शासन और मानवाधिकारों को बनाए रखने और उनकी रक्षा करने और शांति, न्याय और मानव गरिमा सुनिश्चित करने के लिए काम करने वाले सभी लोगों को समर्पित बताया।

संयुक्त राष्ट्र, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। एक तरफ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को भारतीय मूल की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त नवानेथेम नावी पिल्लै को नोबेल पुरस्कार मिलने की आलोचना की। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, विधि के शासन और मानवाधिकारों को बनाए रखने और उनकी रक्षा करने और शांति, न्याय और मानव गरिमा सुनिश्चित करने के लिए काम करने वाले सभी लोगों को समर्पित बताया।

भारतीय मूल की पूर्व संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त को बधाई देते हुए उन्होंने कहा, "उन्होंने (नावी पिल्लै) दिखाया है कि कानून की ताकत को बल के कानून पर हावी होना चाहिए और मानवाधिकारों की रक्षा ही अन्याय के खिलाफ सबसे पुख्ता सुरक्षा है।"

यूएन महासचिव ने कहा, "नोबेल समिति ने दुनिया को याद दिलाया कि शांति स्थायी सिद्धांतों पर बननी चाहिए, न कि शक्तिशाली लोगों की इच्छा पर।"

वर्तमान मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा, "यह वैश्विक मानवाधिकार आंदोलन के लिए गर्व का क्षण है। ऐसे समय में जब मानवाधिकारों पर कई मोर्चों पर हमले हो रहे हैं, जिनमें अपार शक्ति रखने वाले लोग भी शामिल हैं, यह पुरस्कार विशेष रूप से मार्मिक है।"

उन्होंने कहा, "वह अंतरराष्ट्रीय कानून का प्रतीक हैं।" गुटेरेस ने पिल्लै के उस काम का जिक्र किया जो दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला और दमनकारी रंगभेद शासन के खिलाफ खड़े होने वाले अन्य लोगों का बचाव करने से शुरू हुआ था और वर्तमान समय में भी जारी है।

मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में पिल्लै को मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करने में अपनी प्रखर स्वतंत्रता के कारण लगभग सभी देशों, सभी पक्षों की आलोचना का सामना करना पड़ा।

यूएन महासचिव ने कहा, "दशकों से वह अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की चैंपियन रही हैं और हमारे समय के कुछ सबसे ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय कानूनी मामलों के बीच न्याय की एक दृढ़, स्वतंत्र आवाज रही हैं।"

जैसा कि उन्होंने उल्लेख किया, उनकी वर्तमान और हाल की मानवाधिकार वकालत अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की अध्यक्षता से लेकर अंतरराष्ट्रीय अपराधों, जिसमें रवांडा में नरसंहार भी शामिल है, से संबंधित मामलों पर अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीश और रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण की अध्यक्ष होने तक फैली हुई है।

--आईएएनएस

केके/वीसी

Date & Time : 2026-10-09 23:45:05

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