नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों के बीच खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले रायबरेली जिले में अब सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इस जिला इसलिए भी खास हो जाता है, क्योंकि लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इसी क्षेत्र से सांसद हैं।
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नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों के बीच खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले रायबरेली जिले में अब सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इस जिला इसलिए भी खास हो जाता है, क्योंकि लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इसी क्षेत्र से सांसद हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी ने यहां बेहद खास प्रदर्शन किया था और जिले की 6 में से 4 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर भाजपा को झटका दिया था। 2027 में भी सपा अपने इस प्रदर्शन को दोहराने की तैयारी में है, जबकि भाजपा गढ़ में वापसी की रणनीति बना रही है।
रायबरेली जिले की स्थापना 1858 में अंग्रेजों ने की थी और इसका नाम इसके मुख्यालय वाले शहर के नाम पर रखा गया है। मान्यता है कि इस शहर की स्थापना ‘भार’ समुदाय के लोगों ने की थी और तब इसे ‘भरौली’ या ‘बरौली’ कहा जाता था, जो समय के साथ बदलकर रायबरेली हो गया। एक अन्य मान्यता के अनुसार ‘राय’ शब्द कायस्थ समुदाय की एक उपाधि है, जिन्होंने लंबे समय तक इस शहर पर शासन किया था।
स्वतंत्रता आंदोलन में भी रायबरेली ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 8 अगस्त 1942 को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत में जिले में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं, सामूहिक जुर्माने लगे और लाठीचार्ज हुआ। सरेनी में तो पुलिस ने उग्र भीड़ पर गोलियां चला दीं, जिसमें कई लोग मारे गए और कई घायल हो गए। व्यक्तिगत सत्याग्रह के आह्वान पर भी जिले के लोगों ने बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां दीं।
औद्योगिक रूप से रायबरेली बेहद अहम है। यहां एनटीपीसी ऊंचाहार, रेल कोच फैक्ट्री लालगंज और इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्री जैसी प्रमुख सरकारी औद्योगिक इकाइयां स्थित हैं, जो हजारों लोगों को रोजगार देती हैं। प्रशासनिक लिहाज से जिले का कुल क्षेत्रफल 4,043 वर्ग किलोमीटर है। जिले में 6 तहसीलें, 12 ब्लॉक और 1574 गांव आते हैं। यहां मुख्य रूप से हिंदी भाषा बोली जाती है।
जनगणना के अनुसार जिले की कुल जनसंख्या 29,03,507 है, जिसमें ग्रामीण जनसंख्या 26,22,247 और शहरी जनसंख्या 2,81,260 है। कुल 14,95,244 पुरुष और 14,08,263 महिलाएं हैं। जिले में अनुसूचित जाति की आबादी 8,88,004 है, जो कुल आबादी का 30.60 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जनजाति की संख्या 1618 है।
यही आंकड़ा बताता है कि रायबरेली में दलित वोट बैंक निर्णायक भूमिका में है। साक्षरता दर 68.41 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष साक्षरता 78.64 प्रतिशत और महिला साक्षरता 57.58 प्रतिशत है। लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 942 महिलाएं है और जनसंख्या घनत्व 721 है। परिवार का औसत आकार ग्रामीण में 5.6 और शहरी में 5.4 है। जिले में गरीबी रेखा के नीचे 3,29,310 परिवार जीवन यापन कर रहे हैं, जिसमें 3,16,950 ग्रामीण परिवार हैं।
कनेक्टिविटी की बात करें तो रायबरेली का निकटतम हवाई अड्डा अमौसी, लखनऊ है जो 82 किलोमीटर दूर है। रेल मार्ग से रायबरेली जंक्शन देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़ा है और सड़क मार्ग से बस स्टैंड के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। पर्यटन के लिहाज से डलमऊ, इंदिरा उद्यान, समसपुर पक्षी अभ्यारण्य और बेहटा का पुल प्रमुख आकर्षण हैं।
चुनावी समीकरण की बात करें तो रायबरेली में लोकसभा की एक सीट 36-रायबरेली है। 2024 के आम चुनाव में इस सीट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जीत दर्ज की और वर्तमान में लोकसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका में हैं। राहुल को 6,87,649 वोट प्राप्त हुए, वहीं भाजपा उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को 2,97,619 वोट मिले।
वहीं, जिले में विधानसभा की छह सीटें हैं, जिनमें 177-बछरावां, 179-हरचंदपुर, 180-रायबरेली सदर, 182-सरेनी, और 183-ऊंचाहार जो पूरी तरह रायबरेली लोकसभा में आती हैं, जबकि 181-सलोन आंशिक रूप से 37-अमेठी लोकसभा में आती है। 2022 के नतीजों ने सबको चौंकाया।
बछरावां सुरक्षित से श्याम सुंदर भारती, हरचंदपुर से राहुल राजपूत उर्फ राहुल लोधी, सरेनी से देवेंद्र प्रताप सिंह और ऊंचाहार से मनोज कुमार पांडे समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीते, जबकि रायबरेली सदर से अदिति सिंह और सलोन सुरक्षित से अशोक कुमार भारतीय जनता पार्टी से विधायक चुने गए यानी 6 में से 4 सीटों पर सपा काबिज है और 2027 में देखना होगा कि क्या सपा इस बढ़त को बरकरार रख पाती है या भाजपा कांग्रेस के इस पुराने गढ़ में सेंध लगाने में कामयाब होती है।
--आईएएनएस
एससीएच/वीसी
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