मुंबई, 9 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने मानसून सत्र में संसद की कार्यवाही बाधित होने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सही सवाल उठा रहे हैं और विपक्षी दलों का रुख भी सही दिशा में है। उन्होंने कहा कि युवाओं और विपक्ष की बात सरकार को सुननी होगी तथा देश में तानाशाही नहीं चल सकती।
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मुंबई, 9 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने मानसून सत्र में संसद की कार्यवाही बाधित होने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सही सवाल उठा रहे हैं और विपक्षी दलों का रुख भी सही दिशा में है। उन्होंने कहा कि युवाओं और विपक्ष की बात सरकार को सुननी होगी तथा देश में तानाशाही नहीं चल सकती।
मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने दिल्ली में संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई की गई, वह किसके आदेश पर हुई, इसका जवाब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को देना चाहिए। दिल्ली पुलिस तो उनके अधीन है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भी यही मांग कर रहे हैं कि सरकार सदन में आकर इस मुद्दे पर जवाब दें लेकिन गृह मंत्री सदन में जवाब देने के लिए सामने नहीं आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने बिल्कुल सही सवाल उठाया है। पैलेट गन का इस्तेमाल तब तक नहीं किया जाता, जब तक उचित स्तर से आदेश न दिया जाए। हमारे प्रोटोकॉल में साफ कहा गया है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाता है।
चव्हाण ने कहा कि यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत छात्रों से बातचीत कर रहे हैं और उनकी भाषा में उनसे जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी छात्रों और विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए।
मोहन भागवत से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे अमित शाह को कहे कि वे संसद में जाकर इन सवालों का जवाब दें। यह ड्रामा कब तक चलेगा? अमित शाह संसद में आएं और माफी मांगें। युवा पीढ़ी अब यहां से शांत नहीं होगी। लोकतंत्र में जनता और विपक्ष की आवाज सुनी जानी चाहिए। जनतंत्र में भरोसा रखना होगा। तानाशाही की सरकार इस देश में नहीं चलेगी।
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े बिलों पर पृथ्वीराज चव्हाण ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस पूरी कवायद के पीछे असली मकसद संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हासिल करना है। सदन में उन्हें दो-तिहाई बहुमत मिल जाएगा तो वे संविधान में बड़े बदलाव करने और कई प्रावधानों को बदलने में सक्षम हो जाएंगे। यही उनका अंतिम लक्ष्य है।
चव्हाण ने सवाल उठाया कि क्या सरकार महिला आरक्षण का बहाना बनाकर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, महिला आरक्षण और परिसीमन दो अलग-अलग मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की अवधारणा कांग्रेस लेकर आई थी और 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। उन्होंने कहा कि जब वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, तब राज्य में महिलाओं के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया था।
चव्हाण ने कहा कि मौजूदा सरकार जब महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक लेकर आई थी, तब कांग्रेस ने उसका स्वागत किया था, लेकिन इसे परिसीमन के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को पता है कि वह 2029 का लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाएगी, इसलिए वह संविधान में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भले ही इन बिलों के जरिए उनका मकसद हिंदू राष्ट्र बनाने का हो, लेकिन, संविधान में बड़े बदलाव के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की जेनजी के साथ बातचीत पर भी पृथ्वीराज चव्हाण ने तंज कसते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर जिस तरह से सीजेपी के तत्वावधान में प्रदर्शन हुआ, ऐसे प्रदर्शन की उम्मीद भाजपा और संघ को भी नहीं थी।
चव्हाण ने कहा कि पहले किसानों के आंदोलन सहित कई आंदोलनों को सरकार ने दबाने या उनसे निपटने में सफलता हासिल की, लेकिन छात्रों का यह आंदोलन अलग है। उनके मुताबिक, यह आंदोलन किसी विशेष जाति, राज्य, आयु वर्ग या आर्थिक हित से जुड़ा नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर था। इसीलिए छात्र सड़कों पर आए और अपने हक की बात की। भाजपा इस आंदोलन को लेकर पैनिक मोड में चली गई।
चव्हाण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात में वीडियो जारी कर छात्रों से संवाद करने की कोशिश की और इसके बाद संघ प्रमुख ने भी छात्रों तक पहुंचने का प्रयास किया। मोहन भागवत के छात्रों से संवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख ने जेन जी की भाषा में बात करने की कोशिश की और यह दिखाने का प्रयास किया कि वे जेनजी के साथ हैं।
पृथ्वीराज चव्हाण ने भागवत के एंटी-नेशनल वाले बयान पर सवाल करते हुए कहा कि जिन नेताओं ने छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और उन्हें राष्ट्रविरोधी बताया, क्या वे उन नेताओं के बारे में भी कुछ कहेंगे। प्रधानमंत्री को संसद में आकर छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार जनता के सवालों से भाग नहीं सकती, जवाब देना होगा। बंगाल में पूर्व सीएम ममता बनर्जी के काफिले पर हुए हमले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि मेरे पास इस बारे में कोई सीधी जानकारी नहीं है। हालांकि, अगर आप ऐसा कह रहे हैं, तो यह सच ही होगा।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी राजनीतिक गतिविधियां चलाने का पूरा अधिकार है और यह उसका संवैधानिक अधिकार भी है। उन्होंने कहा कि यदि सत्ताधारी पार्टी अपनी ताकत और धन का गलत इस्तेमाल कर विपक्ष को खत्म करने के लिए डराने-धमकाने या बाहुबल का सहारा लेती है, तो ऐसे व्यवहार को स्वीकार या उसका समर्थन नहीं किया जा सकता।
--आईएएनएस
डीकेएम/पीएम
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