
ईरान के उत्तर-पश्चिम हिस्से में स्थित जंजन प्रांत में एक भीषण धमाका हुआ है, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 14 जवानों की जान चली गई। जानकारी के मुताबिक, यह हादसा उस समय हुआ जब IRGC की एक विशेष टीम ‘ऑर्डनेंस क्लियरेंस’ (unexploded ordnance) के मिशन पर थी। ये जवान युद्ध के दौरान गिराए गए उन क्लस्टर बमों और गोला-बारूद को सुरक्षित तरीके से हटा रहे थे जो फटने से रह गए थे। इसी अभियान के दौरान अचानक एक पुराने बम में विस्फोट हो गया, जिससे 14 सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। 7 अप्रैल को हुए युद्धविराम के बाद से ईरानी सेना के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
इस दर्दनाक हादसे के बीच ईरान और अमेरिका के कूटनीतिक रिश्तों में कड़वाहट और बढ़ गई है। IRGC ने सीधे तौर पर अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि होर्मुज की खाड़ी में की गई नाकेबंदी वैश्विक व्यापार में बाधा डालने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। ईरान का दावा है कि इस नाकेबंदी का असली मकसद रूस, चीन और यूरोप के प्रभाव को रोकना था, लेकिन अमेरिका की यह योजना महज 20 दिनों में ही विफल हो गई है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कहना है कि अब ईरान उन देशों के लिए एक मजबूत केंद्र बनकर उभरा है जो अमेरिका की इस 'बाधा डालने' वाली नीति का विरोध करते हैं।
दूसरी ओर, शांति की उम्मीदों को तब बड़ा झटका लगा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि हालांकि ईरान समझौते की इच्छा जता रहा है, लेकिन उनके द्वारा भेजा गया नया प्रस्ताव संतोषजनक नहीं है। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा, "वे समझौता करना चाहते हैं लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं, देखते हैं आगे क्या होता है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान ने कुछ कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि दोनों देश किसी ठोस नतीजे या समझौते तक पहुँच पाएंगे। इस बयान के बाद क्षेत्र में शांति बहाली की राह और भी चुनौतीपूर्ण नजर आने लगी है।
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