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मैहर में नाबालिग अपहरण-मानव तस्करी मामले में 5 दोषियों को 20 साल की सजा


मैहर जिले के अमरपाटन में नाबालिग अपहरण और मानव तस्करी मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामला नाबालिग बालिका के अपहरण, मानव तस्करी और पॉक्सो एक्ट से जुड़ा है।

विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अमरपाटन मानवेन्द्र पवार ने थाना रामनगर के अपराध क्रमांक 277/2023 में यह फैसला सुनाया।

40 हजार रुपये में नाबालिग को बेचने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, घटना 15 जून 2023 की सुबह करीब 5 बजे की है। नाबालिग बालिका घर के बाहर पानी भरने गई थी। इसी दौरान आरोपी राजू मेवाड़ा निवासी भोपाल ने एक अन्य साथी की मदद से उसे मोटरसाइकिल पर बैठाकर कथित रूप से अपहरण कर लिया।

आरोप है कि इसके बाद बालिका को अन्य आरोपियों के माध्यम से 40 हजार रुपये में सुनील गौर को बेच दिया गया। पुलिस के अनुसार, सुनील गौर ने बालिका के नाबालिग होने के बावजूद उससे विवाह किया और उसके साथ दैहिक संबंध स्थापित किए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने नाबालिग की तलाश कर उसे सुरक्षित दस्तयाब किया।

साक्ष्यों के आधार पर दाखिल किया गया आरोप पत्र

जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता के बयान, चिकित्सीय परीक्षण, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों समेत अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। इसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

मामले के विवेचक उपनिरीक्षक भैयालाल रावत ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। वहीं, विशेष लोक अभियोजक पंकज कुमार पटेल ने अदालत में अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी की। गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

पांच आरोपियों को 20-20 साल की सजा

दोषी ठहराए गए आरोपियों में राजू मेवाड़ा, नीता रावत, सुनील गौर, दिनेश उर्फ देवनारायण गौर और भूरीबाई कोल शामिल हैं।

अदालत ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 366, 370(4), 120-बी और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 सहपठित धारा 16 के तहत दोषी पाया। सभी पांच दोषियों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया है।

पुलिस और अभियोजन की संयुक्त पैरवी

पुलिस अधीक्षक मैहर अवधेश प्रताप सिंह ने जघन्य अपराधों में त्वरित सुनवाई और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए थाना प्रभारियों को अभियोजन अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय रखने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस के अनुसार, गवाहों से संपर्क और उनकी न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराने के साथ मामले की प्रभावी पैरवी की गई। पुलिस और अभियोजन के संयुक्त प्रयासों के चलते इस चिन्हित प्रकरण में आरोपियों को कठोर सजा दिलाने में सफलता मिली।

यह फैसला नाबालिगों के अपहरण, मानव तस्करी और यौन अपराधों से जुड़े मामलों में कानून की सख्ती को दर्शाता है।

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