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21 दिन की फरलो पूरी होने के बाद सुनारिया जेल लौटे राम रहीम, 2017 से काट रहे हैं सजा


रोहतक, 16 सितंबर (आईएएनएस)। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की 21 दिन की फरलो बुधवार को समाप्त हो गई। फरलो अवधि पूरी होने के बाद वह शाम करीब 4:55 बजे रोहतक स्थित सुनारिया जेल वापस लौट गए।

रोहतक, 16 सितंबर (आईएएनएस)। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की 21 दिन की फरलो बुधवार को समाप्त हो गई। फरलो अवधि पूरी होने के बाद वह शाम करीब 4:55 बजे रोहतक स्थित सुनारिया जेल वापस लौट गए।

राम रहीम को 25 अगस्त को 21 दिनों की फरलो दी गई थी। इस दौरान वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहे। फरलो के दौरान डेरा परिसर में अनुयायियों की आवाजाही और गतिविधियां रहीं।

सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए राम रहीम की वापसी का समय और यात्रा कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया था। पुलिस और प्रशासन ने भी पूरे घटनाक्रम के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। बताया गया कि किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए उन्हें सुरक्षा घेरे में गुप्त रूप से सुनारिया जेल ले जाया गया।

बता दें कि वर्ष 2017 से सजा काट रहे राम रहीम को अब तक कुल 17 बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है। वर्ष 2026 में यह उनकी तीसरी अस्थायी रिहाई थी। इससे पहले उन्हें जनवरी में 40 दिनों की पैरोल और मई में 30 दिनों की पैरोल मिली थी।

राम रहीम दो साध्वियों से दुष्कर्म मामले में 20 वर्ष की सजा और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं। वह 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं।

राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो दिए जाने को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष का आरोप रहा है कि हर बार रिहाई के फैसले को लेकर पारदर्शिता और उसके समय को लेकर विवाद खड़ा होता है।

इस बार मिली फरलो का भी कई संगठनों और व्यक्तियों ने विरोध किया था। सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने इस पर आपत्ति जताते हुए बंदी सिख कैदियों की रिहाई का मुद्दा उठाया था। अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने सवाल किया था कि लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई लंबित है, जबकि राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो का लाभ दिया जा रहा है।

वहीं, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि बार-बार अस्थायी रिहाई मिलने से पीड़ित परिवारों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

Date & Time : 2026-09-16 18:55:02

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