
मैहर जिले में धान कटाई के बाद खेतों में पराली और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। नियमों की अनदेखी कर खेतों में आग लगाने वाले किसानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में मैहर तहसील के विभिन्न गांवों में नरवाई जलाने के मामले सामने आने पर राजस्व विभाग ने पांच किसानों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करते हुए प्रत्येक किसान पर 2,500 रुपये की पेनल्टी लगाई है। इस तरह कुल 12,500 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मैहर की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, संबंधित सभी किसानों को निर्धारित जुर्माने की राशि सात दिनों के भीतर सरकारी मद में जमा करने को कहा गया है। किसानों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि चालान जमा करने के बाद उसकी पावती अनुविभागीय कार्यालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
प्रशासनिक आदेश के तहत तहसीलदार मैहर को निर्देश दिए गए हैं कि वे अधिरोपित जुर्माना राशि की समय पर वसूली सुनिश्चित कराएं। इसके साथ ही राजस्व अमले और पटवारियों को मैदानी स्तर पर सतत निगरानी रखने को कहा गया है, ताकि किसी भी गांव में फसल अवशेष जलाने की घटना न होने पाए।
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है और भविष्य में भी जो किसान खेतों में पराली जलाते पाए जाएंगे, उन पर और कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पर्यावरण और जमीन की उपजाऊ क्षमता को बचाने के लिए खेतों में फसल अवशेष कतई न जलाएं। नरवाई में आग लगाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि खेत की मिट्टी में मौजूद मित्र कीट और सूक्ष्म पोषक तत्व भी जलकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे जमीन की प्राकृतिक उर्वरता पर गंभीर असर पड़ता है। किसानों को कृषि यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों का खेत में ही प्रबंधन करने की सलाह दी जा रही है।
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