सहारनपुर, 19 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सपा नेता आजम खान के ठिकानों और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आजम खान पर ईडी की कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार पर विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया।
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सहारनपुर, 19 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सपा नेता आजम खान के ठिकानों और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आजम खान पर ईडी की कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार पर विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया।
आजम खान के ठिकानों और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े परिसरों पर हुई कार्रवाई को लेकर इमरान मसूद ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। आजम खान को पहले ही पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। इसके बावजूद भी कार्रवाई का सिलसिला जारी है। विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ 'आप' नेता, दूसरी तरफ आजम खान और फिर किसी अन्य नेता के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सरकार के पास इसके अलावा कोई और काम नहीं है।
कांग्रेस सांसद ने नीट और पेपर लीक से जुड़े मामलों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य से जुड़े मामलों में जिस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए, वह नहीं हो रही है। परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी से छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है, लेकिन इस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जा रही है।
यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे के सवाल पर इमरान मसूद ने कहा कि दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे के लिए किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। दोनों पार्टियां आपस में बैठकर इस मुद्दे को सुलझा सकती हैं। सीटों का फैसला पार्टी स्तर पर होगा। इस तरह के फैसले सार्वजनिक रूप से नहीं किए जाते और न ही इस तरह से तय होते हैं।
यह पूछे जाने पर कि अगर समाजवादी पार्टी कांग्रेस को बराबरी की हिस्सेदारी देने को तैयार नहीं हुई तो क्या कांग्रेस अकेले चुनाव मैदान में उतर सकती है, उन्होंने कहा कि इसका फैसला कांग्रेस पार्टी करेगी। अभी से इस मुद्दे पर उनके और अखिलेश यादव के बीच लड़ाई कराने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
यूपी चुनाव को लेकर मायावती की तैयारियों पर इमरान मसूद ने कहा कि बसपा में टिकट देने की एक प्रक्रिया है और उसी के आधार पर उम्मीदवार तय किए जाते हैं। उन्होंने पार्टी के अंदर नेताओं के निष्कासन और फिर वापसी को लेकर भी सवाल उठाए। मसूद ने कहा कि बसपा में गतिविधियां कथित तौर पर सीमित लोगों के एक समूह के इर्द-गिर्द घूमती रहती हैं। उन्होंने मायावती को जमीनी स्थिति पर ध्यान देने की सलाह देते हुए कहा कि राज्य में दलितों के खिलाफ अत्याचार और उत्पीड़न की घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने दावा किया कि देश में दलित उत्पीड़न के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी काफी अधिक है। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
जब इमरान मसूद से पूछा गया कि क्या दलित समाज मायावती से दूर हो चुका है, तो उन्होंने कहा कि वह यह नहीं कह सकते कि पूरा दलित समाज मायावती से दूर हो चुका है, लेकिन कांग्रेस ने दलित समाज के मुद्दों के लिए ऐतिहासिक रूप से काम किया है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सपनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भूमिहीनों को पट्टे देने और सरकारी नौकरियों में अवसर उपलब्ध कराने जैसे काम किए। जो ताकतें आरक्षण को खत्म करना चाहती हैं, अगर उनके साथ खड़ा हुआ जाए तो यह चिंता की बात है। केवल उम्मीदवार बदलने से राजनीतिक स्थिति नहीं बदलती। बसपा फिलहाल कहीं भी चुनावी मुकाबले में प्रभावी रूप से दिखाई नहीं दे रही है। पिछले कई चुनाव में पार्टी का ग्राफ लगातार नीचे गया है।
मायावती के उस बयान पर कि उनकी चुनावी तैयारियों को देखकर विपक्षी दलों में बेचैनी है और बहुजन समाज को सतर्क रहने की जरूरत है, इमरान मसूद ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मायावती को खुद सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने 2019, 2022 और 2024 के चुनावी परिणामों का हवाला देते हुए कहा कि बसपा के प्रदर्शन को देखते हुए पार्टी नेतृत्व को अपनी राजनीतिक स्थिति पर विचार करना चाहिए। मायावती का चुनावी ग्राफ लगातार गिरा है और ऐसे में उन्हें अपनी रणनीति पर ध्यान देने की जरूरत है।
मायावती द्वारा भाजपा की तारीफ किए जाने को लेकर भी इमरान मसूद ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यही बसपा के पतन का सबसे बड़ा कारण है। जिन लोगों को दलित अत्याचार के लिए जिम्मेदार माना जाता है, उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रशंसा करना बसपा के लिए नुकसानदेह साबित होगा। अगर दलित उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार लोगों की तारीफ की जाएगी तो इसका राजनीतिक असर पड़ेगा। मायावती को इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है।
आशु मलिक और इमरान मसूद के बीच कथित तीखी बहस के वायरल वीडियो को लेकर भी कांग्रेस सांसद ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि वहां किसी तरह की तीखी बहस या झगड़ा नहीं हुआ था। मसूद ने कहा कि कार्यक्रम में सभी लोगों को बोलने का मौका देना उनकी जिम्मेदारी थी और उन्होंने सभी को अपनी बात रखने का अवसर दिया। वायरल वीडियो को जिस तरह से पेश किया जा रहा है, वैसी कोई गंभीर घटना वहां नहीं हुई थी।
--आईएएनएस
पीएसके/एबीएम
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