टीकमगढ़. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता और बदहाली की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। जिले के उदयपुरा गांव में एक बुजुर्ग लंपू की ऑक्सीजन के अभाव में कथित तौर पर मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतक के बेटे काशीराम ने अपने पिता की जलती चिता के पास खड़े होकर एक भावुक और आक्रोशित वीडियो बनाया है, जो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में काशीराम का रुंधा हुआ गला और उनकी आंखों का गुस्सा प्रदेश की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधे सवाल उठा रहा है।
पीड़ित काशीराम का आरोप है कि उनके पिता की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत जतारा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया था। परिजनों का कहना है कि वहां के डॉक्टरों और कर्मचारियों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद समय पर ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध नहीं कराया गया। इलाज में हुई इसी देरी और ऑक्सीजन की कमी के कारण अंततः लंपू ने दम तोड़ दिया। पिता को खोने के गम में डूबे काशीराम ने श्मशान घाट पर चिता की राख को हाथ में लेकर कसम खाई कि वह इस लड़ाई को आगे तक ले जाएंगे ताकि किसी और का परिवार ऑक्सीजन के अभाव में न उजड़े।
वायरल वीडियो में काशीराम राजनेताओं और अधिकारियों को लताड़ लगाते हुए कहते हैं, "साथियों, ये मेरे पिता जी की राख है और ये इस सरकार की भी राख है। हमारा देश और सिस्टम खोखला हो चुका है। अगर अस्पताल में एक सिलिंडर मिल जाता, तो मेरे पिता आज जिंदा होते।" उन्होंने समाज के नेताओं से 'गंदी राजनीति' बंद करने की अपील की और चेतावनी दी कि आज उनके पिता की मौत हुई है, कल किसी और का घर भी उजड़ सकता है। काशीराम के शब्दों में छिपा दर्द और सिस्टम के प्रति नफरत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संसाधनों की भारी कमी को उजागर कर रही है।
इस मार्मिक घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है, हालांकि अभी तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को साझा कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जतारा अस्पताल की जांच की मांग कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि दावों और वादों के बीच आखिर ग्रामीण अंचलों में आम आदमी को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं कब मिलेंगी।
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