
जयपुर. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को जयपुर में आयोजित ‘इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश’ को संबोधित करते हुए राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच मजबूत होते व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों का नया रोडमैप प्रस्तुत किया। निवेशकों को आमंत्रित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों राज्य अब 'जुड़वा भाइयों' की तरह विकास की नई इबारत लिख रहे हैं। उन्होंने राजस्थान के उद्यमियों की कर्मठता की सराहना करते हुए कहा कि पारंपरिक 'रोटी-बाती' का यह ऐतिहासिक संबंध अब पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) जैसी महापरियोजनाओं के जरिए पानी और संसाधनों की साझा प्रगति तक पहुँच गया है।
मुख्यमंत्री ने करीब एक लाख करोड़ रुपए की लागत वाली पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को दोनों राज्यों के लिए गेम-चेंजर बताया। उन्होंने जानकारी दी कि इस परियोजना का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी, जिससे दोनों राज्यों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान होगा। औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने 26 नई नीतियां लागू की हैं, जिनमें प्रक्रियाओं के सरलीकरण के साथ-साथ स्पेस टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक क्षेत्रों के लिए भी विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए डॉ. यादव ने गर्व से कहा कि प्रदेश अब एक 'बिजली सरप्लस' राज्य बन चुका है। यहां उत्पादित बिजली का उपयोग दिल्ली मेट्रो के संचालन के लिए किया जा रहा है और अब उत्तर प्रदेश के साथ साझा बिजली उत्पादन का मॉडल भी तैयार है। मेडिकल सेक्टर में क्रांतिकारी बदलावों की चर्चा करते हुए उन्होंने घोषणा की कि पीपीपी (PPP) मॉडल पर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने के लिए सरकार मात्र एक रुपए की लीज पर जमीन उपलब्ध करा रही है, जिसका उद्देश्य प्रदेश को 'मेडिकल टूरिज्म' का हब बनाना है।
कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सरकार की पहलों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि गौशालाओं के लिए अनुदान राशि को दोगुना कर 40 रुपए प्रति गौमाता कर दिया गया है। साथ ही, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रीवा में टाइगर सफारी और एयरपोर्ट जैसे बुनियादी ढांचों का विकास किया गया है। उन्होंने प्रदेश की नई एविएशन पॉलिसी का भी उल्लेख किया, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बढ़ावा देने के लिए प्रति फ्लाइट 15 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता (VGF) दी जा रही है। अंत में, उन्होंने राजस्थान के निवेशकों से मध्यप्रदेश की इन निवेशक-हितैषी नीतियों का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया।
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