नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी फूड एवं ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने दादरा और नगर हवेली स्थित डाबर इंडिया की एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में गंभीर मैन्युफैक्चरिंग, रखरखाव और डेटा इंटीग्रिटी संबंधी खामियों को लेकर आपत्ति उठाई।
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नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी फूड एवं ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने दादरा और नगर हवेली स्थित डाबर इंडिया की एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में गंभीर मैन्युफैक्चरिंग, रखरखाव और डेटा इंटीग्रिटी संबंधी खामियों को लेकर आपत्ति उठाई।
यूएस एफडीए ने यह आपत्ति ऐसे समय में उठाई है, जब भारतीय दवा और स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद निर्माता गुणवत्ता मानकों और मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस को लेकर अमेरिकी नियामकों की बढ़ती जांच का सामना कर रहे हैं।
यूएस एफडीए की निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, नियामक ने डाबर के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में कई कमियों की पहचान की, जिससे संभावित सूक्ष्मजीवी अशुद्धि और मैन्युफैक्चरिंग मानकों के अनुपालन न होने को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।
जांच एजेंसी ने प्लांट में उपकरण सफाई, रखरखाव और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं में कमियां पाईं। साथ ही, यह भी आरोप लगाया कि कुछ मैन्युफैक्चरिंग डेटा में हेराफेरी की गई थी ताकि उन उपकरणों का उपयोग छिपाया जा सके जिनका उपयोग उनके निर्धारित उत्पादों के अलावा अन्य उत्पादों के लिए किया जा रहा था।
रिपोर्ट में बताया गया कि एफडीए निरीक्षकों को पैकेजिंग सामग्री के पास स्थित कच्चे माल के गोदाम में एक जीवित पक्षी और पक्षी की बीट मिली। निरीक्षकों ने कच्चे माल और तैयार उत्पाद भंडारण क्षेत्रों में छत की सतहों के बड़े हिस्से पर एक अज्ञात काले पदार्थ को भी देखा।
एफडीए ने संयंत्र में किए गए सूक्ष्मजीवविज्ञानी परीक्षण की विश्वसनीयता पर भी चिंता व्यक्त की। हालांकि आधिकारिक डेटा में कथित तौर पर दिखाया गया था कि नमूने निर्धारित सुरक्षा सीमाओं के भीतर थे, निरीक्षकों ने निरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कई नमूनों में अशुद्धि पाई।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी के प्रबंधन ने बाजार में माल की आपूर्ति शुरू करने से पहले उत्पादन और गुणवत्ता संबंधी रिकॉर्ड की ठीक से समीक्षा नहीं की, जिससे नियामकीय अनुपालन में संभावित रूप से चूक हुई।
देश की सबसे पुरानी उपभोक्ता वस्तु कंपनियों में से एक और अमेरिकी बाजार में आयुर्वेदिक और बिना डॉक्टर के पर्चे के मिलने वाले स्वास्थ्य उत्पादों की प्रमुख आपूर्तिकर्ता डाबर इंडिया ने एफडीए की टिप्पणियों पर कोई बयान जारी नहीं किया है।
एफडीए द्वारा फॉर्म 483 जारी की गई कंपनियों को आम तौर पर निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक कार्य योजना प्रस्तुत करनी होती है।
--आईएएनएस
एबीएस
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