अमेठी, 25 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय सेना के लिए स्वदेशी एके-203 राइफल अब पूरी तरह भारत में तैयार होने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर चुकी है। अमेठी जिले के मुंशीगंज थाना क्षेत्र स्थित आयुध निर्माण फैक्ट्री में तैयार की जा रही इस आधुनिक राइफल को 'शेर' नाम दिया गया है। फैक्ट्री में इसके उत्पादन को लगातार बढ़ाने की तैयारी चल रही है और जल्द ही पूरी तरह स्वदेशी कंपोनेंट से बनी राइफलों की खेप भारतीय सेना को सौंपने की योजना है।
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अमेठी, 25 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय सेना के लिए स्वदेशी एके-203 राइफल अब पूरी तरह भारत में तैयार होने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर चुकी है। अमेठी जिले के मुंशीगंज थाना क्षेत्र स्थित आयुध निर्माण फैक्ट्री में तैयार की जा रही इस आधुनिक राइफल को 'शेर' नाम दिया गया है। फैक्ट्री में इसके उत्पादन को लगातार बढ़ाने की तैयारी चल रही है और जल्द ही पूरी तरह स्वदेशी कंपोनेंट से बनी राइफलों की खेप भारतीय सेना को सौंपने की योजना है।
एके-203 के निर्माण और स्वदेशीकरण की प्रगति को लेकर मेजर जनरल सुधीश कुमार शर्मा ने बताया कि भारतीय सेना के लिए राइफल के उत्पादन की प्रक्रिया कई वर्षों में विकसित हुई है। अब इसका सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव यह है कि राइफल के सभी कंपोनेंट भारत में बनाए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही 100 प्रतिशत भारतीय कंपोनेंट से तैयार राइफलों को सेना के ट्रायल के लिए सौंप दिया जाएगा।
मेजर जनरल सुधीश कुमार शर्मा ने आईएएनएस को बताया कि करीब 2019 में भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय ने भारत में एके-203 राइफल बनाने का निर्णय लिया था। इसके लिए तकनीक रूस से भारत में लाने की व्यवस्था की गई। इसके बाद सरकार और संबंधित संस्थाओं के बीच समझौते हुए तथा आईआरआरपीएल नाम की कंपनी का गठन किया गया।
भारत में उत्पादन के लिए तकनीक आने और फैक्ट्री को स्थापित करने की प्रक्रिया में कई वर्ष लगे। इसके बाद 2023 में अमेठी की फैक्ट्री में पहली एके-203 राइफल तैयार की गई। उस समय राइफल में करीब 5 प्रतिशत भारतीय और 95 प्रतिशत रूसी कंपोनेंट थे। अगस्त 2023 से अगस्त 2026 के बीच स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ा बदलाव हुआ है। अब राइफल के 100 प्रतिशत कंपोनेंट भारत में तैयार किए जा रहे हैं। यानी महज तीन वर्षों के दौरान राइफल का निर्माण विदेशी कंपोनेंट पर निर्भर रहने से पूरी तरह स्वदेशी उत्पादन की स्थिति तक पहुंच गया है।
उन्होंने बताया कि अब तक अलग-अलग स्तर के स्वदेशीकरण वाली करीब 55 हजार एके-203 राइफलें भारतीय सेना को सौंपी जा चुकी हैं। इसके साथ ही, अब 100 प्रतिशत भारतीय कंपोनेंट से तैयार राइफलों के ट्रायल की तैयारी की जा रही है। फैक्ट्री में शुरुआती तौर पर ऐसी 10 राइफलें तैयार करने की योजना है। इन राइफलों का परीक्षण पूरा करने के बाद इन्हें भारतीय सेना को यूजर ट्रायल के लिए सौंपा जाएगा। सितंबर 2026 के अंत तक इन 10 राइफलों को तैयार कर टेस्टिंग के बाद सेना को देने का लक्ष्य रखा गया है।
मेजर जनरल ने एके-203 को आधुनिक होने के साथ अपेक्षाकृत सरल डिजाइन वाली राइफल बताया। उन्होंने कहा कि राइफल में करीब 50 प्रमुख कंपोनेंट हैं। इन प्रमुख कंपोनेंट के भीतर छोटे-छोटे पार्ट्स भी शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग गिनने पर संख्या करीब 180 तक पहुंचती है। सभी कंपोनेंट का निर्माण अब भारत में किया जा रहा है। यह गैस-ऑपरेटेड डिजाइन पर आधारित हथियार है। इसकी डिजाइन को सरल, भरोसेमंद और मजबूत बताया गया है।
शर्मा के मुताबिक, अभी तक फैक्ट्री का ध्यान केवल राइफल बनाने पर नहीं बल्कि इसके लिए जरूरी पूरे औद्योगिक इकोसिस्टम को विकसित करने पर भी रहा है। इस इकोसिस्टम में करीब 100 एमएसएमई शामिल हैं और अब यह इकोसिस्टम काफी हद तक तैयार हो चुका है। उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने की जरूरत है, जिसके लिए काम चल रहा है। जब भारतीय सेना 100 प्रतिशत स्वदेशी राइफलों का परीक्षण कर रही होगी, उसी दौरान फैक्ट्री में उत्पादन की तैयारी भी जारी रहेगी। यानी ट्रायल और उत्पादन की प्रक्रिया को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने की योजना है।
योजना के मुताबिक, अप्रैल 2027 में भारतीय सेना को एके-203 की पहली पूरी तरह स्वदेशी खेप सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहली खेप में करीब 7,000 राइफलें देने की तैयारी है। यह खेप विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाले सभी कंपोनेंट भारत में निर्मित होंगे। इससे भारत के रक्षा उत्पादन और स्वदेशीकरण अभियान को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। एके-203 के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए फैक्ट्री ने दीर्घकालिक योजना भी तैयार की है। अनुबंध के तहत भारतीय सेना को 6 लाख से अधिक एके-203 राइफलों की आपूर्ति की जानी है। इसके लिए निर्धारित समयसीमा 2032 तक है।
कोशिश है कि अनुबंध की समयसीमा समाप्त होने से कम से कम एक वर्ष पहले पूरी आपूर्ति कर दी जाए। इसके लिए उत्पादन क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाकर हर महीने करीब 12 हजार राइफल बनाने की योजना है।
--आईएएनएस
पीएसके/एबीएम
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