पुणे, 25 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के पुणे में आदिवासी समुदाय के छात्र पिछले 13 दिनों से हॉस्टल सुविधा और छात्र कल्याण से जुड़ी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मांगों को लेकर 50 फीसदी राजी है और 50 फीसदी पर टालमटोल कर रहा है। आंदोलनकारी छात्रा सुचित्रा ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनकी मांगों का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर 10 दिन में समाधान करने की मांग की है।
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पुणे, 25 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के पुणे में आदिवासी समुदाय के छात्र पिछले 13 दिनों से हॉस्टल सुविधा और छात्र कल्याण से जुड़ी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मांगों को लेकर 50 फीसदी राजी है और 50 फीसदी पर टालमटोल कर रहा है। आंदोलनकारी छात्रा सुचित्रा ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनकी मांगों का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर 10 दिन में समाधान करने की मांग की है।
सुचित्रा ने कहा, "हमारी मांगों को प्रशासन पूरा नहीं कर रहा है। वो 50 फीसदी राजी हैं और 50 फीसदी इनकार कर रहे हैं। जो हमारे लिए जरूरी है, उसे मानने से नकार रहे हैं। वो कह रहे हैं कि हम सोचेंगे। हमें ठोस जवाब चाहिए कि हमारी मांगें पूरी करेंगे या नहीं। अगर हमें लिखित में बयान मिल जाता, तो हम आंदोलन रोक देते। वो कह रहे हैं कि आप आंदोलन रोक दो, हम मुख्यमंत्री से आपकी मुलाकात कराएंगे। वो सीधा कह रहे हैं कि समाधान के बिना आप आंदोलन रोक दो। ये गलत है। ऐसा किसी जगह नहीं लिखा कि आप विरोध-प्रदर्शन कर रहे हों, तो बिना किसी समाधान के पीछे हट जाओ। हम पीछे नहीं हटेंगे, अपना आंदोलन जारी रखेंगे। हमारी मांगें पूरी होनी ही चाहिए।"
उन्होंने कहा, "हमारी मांग है कि जहां हमारा छात्रावास है, वहां से आने में दो घंटे लगते हैं। ट्रैफिक बहुत ज्यादा होता है। छात्रावास सोलापुर बॉर्डर पर है। हमारी मांग है कि अगर हॉस्टल सेंटर में होता तो न तो लड़कियों को और न ही लड़कों को परेशानी होती। वर्तमान समय में हम अपने हॉस्टल से कॉलेज तक सफर करके जाते हैं। हमारी पढ़ाई में परेशानी होती है। अगर सेंटर में हमारा छात्रावास होता, तो परेशानी नहीं होती। हमारे साथ उत्पीड़न नहीं होता।"
सुचित्रा ने कहा कि हम लैब में रहते हैं। हम रात के आठ बजे हॉस्टल जाते हैं। पढ़ाई हमारे लिए बहुत जरूरी है। चार घंटे हमें कॉलेज जाने-आने में लगते हैं, तो पढ़ाई कब करेंगे और नौकरी कब करेंगे? प्रशासन अगर इस चीज पर काम नहीं करेगा तो किस चीज पर एक्शन लेगा? मैंने इस संबंध में राहुल गांधी से भी मुलाकात की और मेरी दोस्त ने अपनी परेशानी बताई। राहुल गांधी ने इस संबंध में काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा कि आप मुझे बुलाओं, मैं वहां पर आऊंगा। मुलाकात के दो दिनों बाद ही हमें राहुल गांधी का एक लेटर मिला। उन्होंने सीएम फडणवीस को चिट्ठी भेजी है और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि 10 दिनों के अंदर बच्चों की मांग पूरी करिए, वरना मैं खुद आकर प्रदर्शन में बैठूंगा। यह बहुत अच्छा कदम है कि राहुल गांधी हमारी मदद कर रहे हैं।
सूरज नाम के एक अन्य आंदोलनकारी ने कहा, "5 अगस्त को सुधारिक सरकारी संकल्प आया था, उसके बाद से अनशन पर बैठे हैं। जो हमारी प्रमुख मांगें हैं, उसमें आदिवासी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित लगभग 12,500 रिक्त पदों में सुप्रीम कोर्ट का 2017 का जो आदेश था, उसमें बताया गया था कि जो वास्तविक आदिवासी हैं, उन्हें वो अवसर दीजिए और जिन्होंने धोखाधड़ी की, उन्हें निकालिए। लेकिन आज तक उसमें कोई काम नहीं हो रहा है।"
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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