
अनूपपुर जिले में स्थित बहेराबंद भूमिगत खदान में हुए करोड़ों रुपये के कोयला घोटाले में सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के चार कर्मचारियों को 11,382 मीट्रिक टन कोयले की हेराफेरी और कमी के मामले में दोषी पाया है। इस बहुचर्चित मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों को जेल और भारी जुर्माने की सजा से दंडित किया है।
सीबीआई विशेष न्यायालय के न्यायाधीश रूपेश कुमार गुप्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को अलग-अलग धाराओं के तहत सजा सुनाई। अदालत ने इस घोटाले के दो मुख्य आरोपियों, ए. के. गोस्वामी और आर. एल. प्रसाद को आपराधिक साजिश और अमानत में ख्यानत का दोषी पाया। कोर्ट ने दोनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी, 409 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अधिकतम 4-4 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही इन दोनों दोषियों पर 1 लाख 15 हजार रुपये प्रति व्यक्ति (कुल 2.30 लाख रुपये) का अर्थदंड भी लगाया गया है।
इस मामले में वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ी छिपाने के दोषी पाए गए दो अन्य सह-आरोपियों पर भी कानून का शिकंजा कसा है। न्यायालय ने एम. एम. शर्मा और आर. डी. दीवान को सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी करने और गलत रिकॉर्ड पेश करने का दोषी माना। इन दोनों को आईपीसी की धारा 218 और 34 के तहत 1-1 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही, दोनों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। चारों आरोपियों पर कोर्ट द्वारा लगाया गया कुल जुर्माना 2.40 लाख रुपये है।
विशेष न्यायालय में सीबीआई का पक्ष रखते हुए लोक अभियोजक (अधिवक्ता) संजय उपाध्याय ने पूरी घटना का ब्यौरा दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि एसईसीएल (SECL) हसदेव एरिया के अंतर्गत आने वाली अनूपपुर की बहेराबंद भूमिगत खदान में कोयले के स्टॉक में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गोपनीय सूचना मिली थी। इस इनपुट के आधार पर एसईसीएल बिलासपुर के सतर्कता (विजिलेंस) विभाग और सीबीआई जबलपुर की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया था।
निरीक्षण में खुली पोल: जब संयुक्त टीम ने बहेराबंद खदान के अधिकृत कोल स्टॉक यार्ड का औचक निरीक्षण और भौतिक सत्यापन किया, तो वहां मौजूद कोयले की वास्तविक मात्रा सरकारी रिकॉर्ड (बुक स्टॉक) से मेल नहीं खाती थी। जांच में पाया गया कि स्टॉक से कुल 11,382 मीट्रिक टन कोयला गायब था।
स्टॉक यार्ड में इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की कमी पाए जाने के बाद, सीबीआई जबलपुर ने तत्परता दिखाते हुए एसईसीएल के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मामले की गहन विवेचना करने के बाद आरोपियों के खिलाफ सीबीआई विशेष न्यायालय के समक्ष पुख्ता चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने कई गवाह और तकनीकी साक्ष्य पेश किए गए, जिनके आधार पर न्यायाधीश ने चारों कर्मचारियों को इस भ्रष्टाचार का सीधा जिम्मेदार मानते हुए जेल भेज दिया।
Leave A Reviews