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आपातकाल लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा हमला था: जेपी नड्डा


पटना, 25 जून (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र, संविधान और नागरिक स्वतंत्रता पर सबसे बड़ा हमला था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई का बीज बिहार और पटना की धरती पर बोया गया था, इसलिए ‘संविधान हत्या दिवस’ के मौके पर पटना में आयोजित कार्यक्रम का विशेष महत्व है।

पटना, 25 जून (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र, संविधान और नागरिक स्वतंत्रता पर सबसे बड़ा हमला था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई का बीज बिहार और पटना की धरती पर बोया गया था, इसलिए ‘संविधान हत्या दिवस’ के मौके पर पटना में आयोजित कार्यक्रम का विशेष महत्व है।

पटना में आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि देशभर में भाजपा की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन पटना का यह आयोजन अपने आप में खास है, क्योंकि लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ जो संघर्ष शुरू हुआ, उसकी मजबूत पृष्ठभूमि बिहार में बनी।

उन्होंने कहा कि ज्ञान भवन से कुछ ही दूरी पर स्थित गांधी मैदान उस ऐतिहासिक आंदोलन का साक्षी है, जहां 5 जून 1974 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया था। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि वह स्वयं छात्र जीवन में इस आंदोलन का हिस्सा रहे हैं और उस दौर की घटनाओं के प्रत्यक्ष गवाह हैं। उन्होंने कहा कि 18 मार्च 1974 और 5 जून 1974 की घटनाएं उस जनांदोलन की नींव के पत्थर साबित हुई थीं।

उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली गई, नागरिक अधिकारों को कुचल दिया गया और संविधान की मूल भावना पर सीधा आघात किया गया। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनावी अनियमितताओं का दोषी ठहराए जाने के बाद सत्ता बचाने के लिए आपातकाल थोपा गया, जो करीब 21 महीने तक चला।

उन्होंने दावा किया कि उस दौरान 1.31 लाख लोगों को बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के जेल में डाल दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि आपातकाल के दौरान 1.10 करोड़ लोगों की नसबंदी कराई गई, जिनमें से करीब 80 लाख मामले 1975-76 में हुए। उनके मुताबिक, दिल्ली में 1.50 लाख मकान तोड़े गए और सात लाख लोग बेघर हुए, जबकि 300 से अधिक पत्रकार जेलों में बंद रहे।

जेपी नड्डा ने कहा कि आपातकाल के दौरान 42वां संविधान संशोधन लाकर जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल पांच वर्ष से बढ़ाकर छह वर्ष कर दिया गया और कई संवैधानिक पदों को न्यायिक समीक्षा से ऊपर रखने की कोशिश की गई। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज संविधान बचाने की बात करते हैं, उन्हें पहले आपातकाल के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन ने लोकतंत्र पर हुए इस कुठाराघात का मुंहतोड़ जवाब दिया था। नड्डा ने जेपी आंदोलन के सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ को याद करने का उद्देश्य नई पीढ़ी को उस दौर की सच्चाई से अवगत कराना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति सजग बनाना है।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी

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