काबुल, 21 जून (आईएएनएस)। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान शरणार्थियों को गैर-कानूनी तरीके से निकालने से रोकने की अपील की है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के मुताबिक उनकी जरूरतों की रक्षा करने को कहा है।
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काबुल, 21 जून (आईएएनएस)। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान शरणार्थियों को गैर-कानूनी तरीके से निकालने से रोकने की अपील की है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के मुताबिक उनकी जरूरतों की रक्षा करने को कहा है।
मानवाधिकार समूह ने कहा कि अफगान शरणार्थी को होस्ट देशों में मनमानी गिरफ्तारी और परिवार से अलग होने का सामना करना पड़ता है और जब वे अफगानिस्तान लौटते हैं तो उन्हें मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी सामना करना पड़ता है।
एमनेस्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "दुनिया भर में लाखों अफगान शरणार्थी को निकाला जा रहा है और यह संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। होस्ट देशों में, उन्हें मनमानी गिरफ्तारी और परिवार से अलग होने का सामना करना पड़ रहा है; लौटने पर, उन्हें दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक के बीच मानवाधिकार के उल्लंघन का सामना करना पड़ रहा है।"
इसमें आगे कहा गया, "अफगान लोगों को गैर-कानूनी तरीके से निकालना बंद होना चाहिए और जिन लोगों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत है, उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के हिसाब से सुरक्षित रखा जाना चाहिए।"
एजेंसी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां पड़ोसी देशों से अफगान शरणार्थियों को देश से निकालने में बढ़ोतरी की रिपोर्ट कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचआरसी) और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने बार-बार कहा है कि अफगान शरणार्थियों की वापसी सुरक्षित और सम्मानजनक होनी चाहिए और लौटने वालों के लिए ज्यादा अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मांग की है।
मई की शुरुआत में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के उच्चायुक्त, वोल्कर टर्क ने अफगान शरणार्थियों और शरण चाहने वालों को होस्ट देशों से अफगानिस्तान में लगातार जबरदस्ती वापस भेजने के खिलाफ चेतावनी दी थी और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और शरणार्थी कानून का उल्लंघन बताया था।
उन्होंने कहा, "अफगान महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को उन देशों से बाहर निकाला जा रहा है जहां वे सुरक्षा चाहते थे, जिससे उन्हें अपनी मर्जी के खिलाफ अफगानिस्तान लौटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और वे गंभीर खतरे में पड़ रहे हैं।"
यूएनएचआरसी के अनुसार, इस साल की शुरुआत से अब तक करीब 2,70,000 अफगान लोगों को अफगानिस्तान भेजा गया है, जिनमें से ज्यादातर ईरान और पाकिस्तान से हैं और तुर्किए और ताजिकिस्तान से कम लोग हैं। यह पिछले साल ईरान से 1.2 मिलियन और पाकिस्तान से 150,000 से ज्यादा अफगान शरणार्थियों को भेजे जाने के अलावा है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार एजेंसी ने जोर देकर कहा कि महिलाओं और लड़कियों, पिछली अफगान सरकार और उसके सुरक्षा बलों से जुड़े लोगों, मीडिया श्रमिकों, सिविल सोसाइटी और एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के सदस्यों पर बदले की कार्रवाई और मानवाधिकार के उल्लंघन का गंभीर खतरा बना हुआ है।
वोल्कर टर्क ने कहा, "जिन लोगों को मानवाधिकार के उल्लंघन का गंभीर खतरा है, उन्हें बिना मर्जी के अफगानिस्तान वापस भेजना नॉन-रिफाउलमेंट के मुख्य अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ है। मैं देशों से अपील करता हूं कि वे अपनी अंतरराष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारियों का पालन करें और अफगान लोगों की रक्षा करें, ऐसा कोई काम न करें जिससे लौटने पर उन्हें ऐसा नुकसान हो जिसे ठीक न किया जा सके।"
अफगानिस्तान में यूएन सहायक मिशन (यूएनएएमए) और यूएन मानवाधिकार ऑफिस (ओएचसीएचआर) की 2025 की रिपोर्ट, जिसका टाइटल “नो सेफ हेवन” है, के अनुसार, अफगानिस्तान में जबरदस्ती डिपोर्ट किए गए अफगान शरणार्थियों को तालिबान अधिकारियों द्वारा कई तरह के गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का सामना करना पड़ा, जिसमें मनमानी गिरफ्तारी, हिरासत, टॉर्चर और बुरा बर्ताव शामिल है।
जहां यूरोपीय संघ के कई सदस्य देश अफगान नागरिकों की वापसी के लिए ज्यादा मिलकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने उन बढ़ती रिपोर्ट्स पर भी चिंता जताई है कि यूरोप के कुछ देश अब अफगानिस्तान में मानवाधिकार की बहुत गंभीर स्थिति के बावजूद डिपोर्टेशन फिर से शुरू कर रहे हैं या इस पर विचार कर रहे हैं।
टर्क ने कहा कि उनकी वापसी को लेकर ईयू के प्रस्तावित नए नियमों, जिनकी अभी समीक्षा हो रही है, ने भी चिंता पैदा की है, क्योंकि ये ह्यूमन राइट्स सेफगार्ड्स को कमजोर कर सकते हैं और लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
उन्होंने कहा, “मैं पर्सनलाइज्ड रिस्क असेसमेंट के बिना अफगानिस्तान में सभी बिना मर्जी के वापसी के खिलाफ पूरी तरह से चेतावनी देता हूं, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और शरणार्थी कानून के अनुसार जरूरी है और किया जाना चाहिए।”
--आईएएनएस
केके/डीएससी
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