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आरएसएस का विस्तार तो हुआ, लेकिन अच्छे इंसानों की कमी बढ़ी, आत्ममंथन जरूरी : कैलाश विजयवर्गीय


भोपाल, 27 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर अपनी टिप्पणी से राजनीतिक बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि हालांकि भाजपा के सत्ता में आने के बाद संगठन का काफी विस्तार हुआ है, लेकिन इसके सदस्यों के बीच 'अच्छे इंसानों' की कमी बढ़ती जा रही है।

भोपाल, 27 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर अपनी टिप्पणी से राजनीतिक बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि हालांकि भाजपा के सत्ता में आने के बाद संगठन का काफी विस्तार हुआ है, लेकिन इसके सदस्यों के बीच 'अच्छे इंसानों' की कमी बढ़ती जा रही है।

भाजपा नेता की ये बातें ऐसे समय में आई हैं जब कांग्रेस ने राम मंदिर से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर आरएसएस और बीजेपी पर हमले तेज कर दिए हैं और संगठन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।

भोपाल में शुक्रवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि बीजेपी के सरकार बनाने के बाद अब कई सरकारी अधिकारी आरएसएस से लंबे समय से जुड़े होने का दावा करते हैं।

विजयवर्गीय ने कहा, "हमारी सरकार में शामिल होने वाला हर अधिकारी कहता है, 'मैंने भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बेल्ट और शॉर्ट्स पहनी हैं।' सरकार के सत्ता में आने के बाद, हर कोई संघ से जुड़ गया। एक अधिकारी ने मुझे बताया कि उनके पिता आरएसएस की शाखाओं में जाते थे, जबकि दूसरे ने कहा कि उनके पिता एक शाखा के अध्यक्ष थे, जबकि ऐसी कोई पोस्ट होती ही नहीं है।"

उन्होंने कहा कि संगठन का तेजी से विस्तार उसके मूल मूल्यों और चरित्र की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा, "आज हर तरह की भीड़ है, फिर भी उनके बीच अच्छे इंसानों की कमी है। यही सच्चाई है। संगठन बढ़ रहा है और विचारधारा भी फैल रही है। लेकिन अगर अच्छे इंसान ही नहीं हैं, तो इस विचारधारा का क्या महत्व है? हमें इस पर गहराई से सोचने की जरूरत है।"

कार्यक्रम में मौजूद कुछ प्रमुख वरिष्ठ आरएसएस कार्यकर्ताओं को याद करते हुए, विजयवर्गीय ने उन्हें ऐसे लोगों के उदाहरण के तौर पर बताया जिनकी ईमानदारी और प्रतिबद्धता संगठन के आदर्शों को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि ऐसी शख्सियतें अब कम ही देखने को मिलती हैं और संगठन के भीतर आत्म-मंथन करने का आह्वान किया।

उनके बयानों ने राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया है क्योंकि ये ऐसे समय में आए हैं जब विपक्ष ने आरएसएस की फिर से आलोचना शुरू कर दी है।

--आईएएनएस

एससीएच

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