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अर्ध मत्स्येन्द्रासन से एड्रिनल ग्रंथि होगी मजबूत, पाचन भी होगा बेहतर


नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी सेहत का ठीक से ध्यान नहीं रख पाते, जिससे कई तरह की शारीरिक समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में योगासन एक सरल और प्रभावी समाधान बनकर सामने आते हैं और इन्हीं महत्वपूर्ण आसनों में 'अर्ध मत्स्येन्द्रासन' शरीर के लिए काफी लाभदायक है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और पाचन को बेहतर करने के लिए जाना जाता है।

नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी सेहत का ठीक से ध्यान नहीं रख पाते, जिससे कई तरह की शारीरिक समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में योगासन एक सरल और प्रभावी समाधान बनकर सामने आते हैं और इन्हीं महत्वपूर्ण आसनों में 'अर्ध मत्स्येन्द्रासन' शरीर के लिए काफी लाभदायक है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और पाचन को बेहतर करने के लिए जाना जाता है।

संस्कृत में 'अर्ध' का अर्थ आधा, 'मत्स्य' का अर्थ मछली और 'इंद्र' का अर्थ राजा होता है। यह आसन महान योगी मत्स्येन्द्रनाथ के नाम पर रखा गया है। यह एक बैठकर किया जाने वाला रीढ़ को मोड़ने वाला योग आसन है, जिसका नाम महान योगी मत्स्येंद्रनाथ के नाम पर रखा गया है। यह न सिर्फ मांसपेशियों को लचीला बनाता है बल्कि ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर करता है और शरीर को डिटॉक्स करता है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसे लेकर सटीक जानकारी दी है, जिसके अनुसार 'अर्ध मत्स्येन्द्रासन' रीढ़ की हड्डी की मजबूती, लचीलेपन और बेहतर पाचन तंत्र के लिए एक अत्यंत प्रभावशाली योगासन है। एड्रिनल ग्रंथि की स्थिति में सुधार होता है। साथ ही, यह कब्ज, दमा और पाचन संबंधी समस्याओं से निजात भी दिलाता है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन का नियमित अभ्यास करने से शरीर की कई ग्रंथियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसमें एड्रिनल ग्रंथि भी शामिल है। यह आसन शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कोर्टिसोल को नियंत्रित करने में मदद करता है। एड्रिनल ग्रंथि ही कोर्टिसोल हार्मोन बनाती है, इस आसन से उस पर दबाव कम होता है। एड्रिनल ग्रंथि के बेहतर काम करने से शरीर में ऊर्जा का स्तर बना रहता है, थकान कम लगती है और शरीर का हार्मोनल संतुलन ठीक रहता है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह आसन मधुमेह रोगियों के लिए भी एक अच्छा विकल्प है। साथ ही यह आसन पेनक्रियाज को एक्टिव करता है। 'अर्ध मत्स्येन्द्रासन' का अभ्यास करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं लेकिन गर्भावस्था और मासिक धर्म के दौरान इस आसन को करने से बचना चाहिए। वहीं, पेप्टिक अल्सर, हर्निया या स्लिप-डिस्क की गंभीर समस्या होने पर इस आसन का अभ्यास वर्जित है।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

Date & Time : 2026-11-03 10:25:04

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