मुंबई, 31 मई (आईएएनएस)। अभिनेता आर. माधवन पर्दे पर अपनी सहज अभिनय शैली, शांत स्वभाव और दमदार किरदारों के लिए पहचाने जाते है। उनकी जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने कभी अभिनेता बनने का सपना नहीं देखा था। उनका लक्ष्य भारतीय सेना में जाकर देश की सेवा करना था। हालांकि किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था और एक छोटी सी वजह ने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी।
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मुंबई, 31 मई (आईएएनएस)। अभिनेता आर. माधवन पर्दे पर अपनी सहज अभिनय शैली, शांत स्वभाव और दमदार किरदारों के लिए पहचाने जाते है। उनकी जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने कभी अभिनेता बनने का सपना नहीं देखा था। उनका लक्ष्य भारतीय सेना में जाकर देश की सेवा करना था। हालांकि किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था और एक छोटी सी वजह ने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी।
आर. माधवन का जन्म 1 जून 1970 को जमशेदपुर में एक तमिल परिवार में हुआ था। उनके पिता रंगनाथन टाटा स्टील में मैनेजमेंट एग्जीक्यूटिव थे, जबकि उनकी मां सरोजा बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर थीं। माधवन ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जमशेदपुर में की और बाद में इलेक्ट्रॉनिक्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें खेल, भाषण कला और एनसीसी में भी गहरी रुचि थी।
युवा उम्र में उनका सबसे बड़ा सपना सेना की वर्दी पहनना था। उन्होंने एनसीसी में शानदार प्रदर्शन किया और महाराष्ट्र के सर्वश्रेष्ठ कैडेट्स में गिने गए। इसी उपलब्धि के कारण उन्हें ब्रिटेन जाकर सेना से जुड़ी स्पेशल ट्रेनिंग लेने का अवसर भी मिला। उन्होंने भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी ट्रेनिंग हासिल की लेकिन जब सेना में शामिल होने का मौका आया तो उनकी उम्र निर्धारित सीमा से केवल छह महीने कम निकली। यह उनके जीवन का ऐसा मोड़ था जिसने उनका सपना तोड़ दिया, लेकिन आगे चलकर उन्हें एक नई राह दिखा दी।
सेना में नहीं जा पाने के बाद माधवन ने पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और पब्लिक स्पीकिंग की क्लास लेना शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। एक पोर्टफोलियो मॉडलिंग एजेंसी को भेजने के बाद उन्हें विज्ञापनों के ऑफर मिलने लगे। धीरे-धीरे टेलीविजन सीरियल्स में काम करने का मौका मिला और फिर अभिनय की दुनिया का सफर शुरू हो गया।
फिल्मों में उनकी असली पहचान साल 2000 में आई तमिल फिल्म 'अलाई पायूथे' से बनी। यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और माधवन रातों-रात दर्शकों के चहेते बन गए। हिंदी सिनेमा में उन्हें पहचान 'रहना है तेरे दिल में' से मिली। भले ही फिल्म उस समय बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन बाद में यह युवाओं के बीच एक कल्ट फिल्म बन गई। इसके बाद उन्होंने 'रंग दे बसंती', '3 इडियट्स', 'तनु वेड्स मनु', 'विक्रम वेधा' और 'रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट' जैसी फिल्मों में दमदार अभिनय किया।
माधवन अभिनेता के अलावा, लेखक, निर्माता और निर्देशक के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। 'रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट' उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक रही, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।
पुरस्कारों की बात करें तो माधवन को एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई फिल्मफेयर पुरस्कार, तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार और साउथ इंडियन इंटरनेशनल मूवी अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है।
--आईएएनएस
पीके/वीसी
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