
अशोकनगर के प्रतिष्ठित कारोबारियों से रंगदारी मांगने और शहर में दहशत फैलाने की साजिश रचने के मामले में पुलिस को एक और महत्वपूर्ण कामयाबी मिली है। मामले की कड़ियाँ जोड़ते हुए पुलिस ने बुधवार को कुख्यात आरोपी जय प्रकाश दारा उर्फ जेपी को राजस्थान की बीकानेर जेल से प्रोडक्शन वारंट पर अशोकनगर लाया है। पुलिस का दावा है कि जेपी ने ही जेल के अंदर से इस पूरे नेटवर्क को संचालित किया और मुख्य शूटर को पैसे भिजवाए थे।
जुर्म की दुनिया का पुराना खिलाड़ी है जेपी पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी जय प्रकाश ने महज 14 वर्ष की उम्र में ही अपराध की दुनिया में कदम रख लिया था। आरोपी पर नाबालिग रहते हुए ही हत्या और रंगदारी जैसे गंभीर 13 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। बालिग होने के बाद उसे बाल सुधार गृह से जेल शिफ्ट किया गया था। आरोप है कि अशोकनगर में दहशत फैलाने के लिए भेजे गए मनीष जांगिड़ को जेपी ने ही जेल के भीतर से किसी माध्यम के जरिए फंडिंग उपलब्ध कराई थी।
एसटीएफ की कार्रवाई और अन्य आरोपियों की पेशी विशेष कार्यबल (STF) इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। इससे पहले गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी मनीष जांगिड़, दिनेश सुथार और प्रदीप शुक्ला को बुधवार को अशोकनगर न्यायालय में पेश किया गया। एसटीएफ की एसआईटी (SIT) टीम ने, जिसमें सब इंस्पेक्टर सतेंद्र कुशवाह भी शामिल हैं, इन आरोपियों को रिमांड पर लिया है। इनसे पूछताछ के बाद ही जेपी दारा की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिले, जिसके बाद उसे राजस्थान से लाया गया।
क्या था पूरा मामला? यह सनसनीखेज मामला तब शुरू हुआ जब अशोकनगर के दो बड़े कारोबारियों को अज्ञात नंबरों से फोन और वॉयस नोट के जरिए धमकाया गया और करोड़ों की रंगदारी मांगी गई। दहशत पैदा करने के लिए मनीष जांगिड़ को शहर भेजा गया था, जिसने पेट्रोल बम फेंकने की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी से वह पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि मनीष को पैसे दिनेश सुथार और प्रदीप शुक्ला ने पहुंचाए थे, जिनका सीधा संबंध बीकानेर जेल में बंद जेपी दारा से था। फिलहाल पुलिस इस गैंग के अन्य सदस्यों और उनके संभावित स्थानीय मददगारों की तलाश कर रही है।
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