
नरसिंहपुर जिले में एक निजी अस्पताल की कथित लापरवाही ने एक हंसती-खेलती तीन साल की मासूम की जान ले ली। इस मामले में इंसाफ की मांग को लेकर पीड़ित पिता नीलेश मिश्रा की शिकायत पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को एसडीएम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद, पुलिस और तहसील अधिकारियों की मौजूदगी में झिरना मुक्तिधाम से मासूम के शव को 6 दिन बाद पोस्टमार्टम के लिए बाहर निकाला गया।
बुखार के नाम पर अस्पताल ने किया 'खेल' मृतक बच्ची के पिता नीलेश मिश्रा के अनुसार, 5 अप्रैल 2026 को उनकी बेटी को हल्का बुखार और सुस्ती थी। वे उसे शहर के एक निजी अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने इसे सामान्य बीमारी बताकर भर्ती कर लिया। परिजनों का आरोप है कि शाम को कई इंजेक्शन लगाने के बाद बच्ची को घर भेज दिया गया, जबकि उसकी हालत स्थिर नहीं थी। अगले दिन (6 अप्रैल) जब बच्ची को सांस लेने में तकलीफ हुई और दोबारा अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने रिपोर्ट सामान्य बताकर फिर घर भेज दिया।
जबलपुर में वेंटिलेटर पर तोड़ा दम परिजनों ने बताया कि 7 अप्रैल की रात बच्ची पूरी तरह अचेत हो गई। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। जबलपुर में मासूम को आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन इलाज के दौरान 9 अप्रैल को उसकी मृत्यु हो गई। शोक संतप्त परिवार ने झिरना मुक्तिधाम में बच्ची का अंतिम संस्कार (दफन) कर दिया था।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच अंतिम संस्कार के बाद परिजनों ने जब अस्पताल की लापरवाही को लेकर कलेक्टर, सीएमएचओ (CMHO) और कोतवाली थाने में शिकायत की, तो मामला गरमा गया। कोतवाली थाना प्रभारी गौरव चाटे ने बताया कि एसडीएम कोर्ट के आदेश पर बुधवार को शव को कब्र से निकालकर विशेषज्ञों की टीम द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया है।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की जांच के आधार पर अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर आक्रोश व्याप्त है और लोग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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