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बाल विवाह मुक्त महाराष्ट्र हमारा अंतिम लक्ष्य: मंत्री अदिति तटकरे


मुंबई, 30 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) मंत्री अदिति तटकरे ने शनिवार को कहा कि 'बाल विवाह मुक्त महाराष्ट्र' राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि विभाग ने राज्य भर में बाल विवाहों को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए एक सक्षम, गतिशील और आधुनिक प्रणाली स्थापित की है।

मुंबई, 30 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) मंत्री अदिति तटकरे ने शनिवार को कहा कि 'बाल विवाह मुक्त महाराष्ट्र' राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि विभाग ने राज्य भर में बाल विवाहों को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए एक सक्षम, गतिशील और आधुनिक प्रणाली स्थापित की है।

पारंपरिक कानून प्रवर्तन से आगे बढ़ते हुए, 'बाल विवाह मुक्त महाराष्ट्र' अभियान ने हर स्तर पर आम नागरिकों को सक्रिय रूप से शामिल किया है।

मंत्री ने आगे कहा कि इस सामूहिक, समुदाय-संचालित दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण परिणाम प्राप्त हुए हैं; प्रशासन ने पिछले वर्ष 1,400 और चालू वर्ष में 1,450 बाल विवाहों को सफलतापूर्वक रोका है।

मंत्री तटकरे के अनुसार, बाल विवाह सामाजिक-आर्थिक कमजोरियों से गहराई से जुड़े हुए हैं, और महिला एवं बाल विकास विभाग इन मूल कारणों से सीधे निपटने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि एक प्रमुख जनसांख्यिकीय कारक राज्य भर में, विशेष रूप से मराठवाड़ा क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों का आवागमन है। चूंकि माता-पिता दिनभर दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, इसलिए 12 से 14 वर्ष की बेटी को घर पर अकेला छोड़ना सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा करता है। यह विशेष असुरक्षा अक्सर चिंतित परिवारों को कम उम्र में विवाह करने के लिए प्रेरित करती है।

मंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि इस समस्या से निपटने के लिए, विभाग ने विशेष 'बाल गृह' आश्रय स्थापित किए हैं, जहां ये युवा लड़कियां पूरी सुरक्षा में रह सकती हैं और बिना किसी रुकावट के अपनी शिक्षा जारी रख सकती हैं। इसके अलावा, राज्य की निरंतर सहायता सुनिश्चित करने के लिए, प्रवासी श्रमिकों के छोटे बच्चों के लिए एक आधुनिक ट्रैकिंग पोर्टल शुरू किया गया है। हालांकि ये बच्चे आमतौर पर अपने पैतृक गांवों में आंगनवाड़ियों में जाते हैं, डिजिटल प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि जब परिवार काम के लिए जिलों में पलायन करते हैं, तो बच्चों का नामांकन निकटतम स्थानीय आंगनवाड़ी में आसानी से हो जाता है, जिससे कोई भी छूट न जाए।

जीरो टोलरेंस नीति पर जोर देते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए आक्रामक रूप से कदम उठा रहा है कि कानून एक वास्तविक निवारक के रूप में कार्य करे।

मंत्री तटकरे ने कहा कि हमने न केवल बाल विवाह कराने वाले माता-पिता के खिलाफ, बल्कि विवाह कराने वाले पुजारी, इसमें सहयोग करने वाले बिचौलियों और विवाह में शामिल होने वाले मेहमानों के खिलाफ भी मामले दर्ज करना शुरू कर दिया है। उन्होंने पुष्टि की कि वह स्वयं इस प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इस सख्त कानूनी रुख ने समाज को एक सशक्त संदेश दिया है।

--आईएएनएस

एमएस/

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