
बालाघाट जिले से पुलिस हिरासत में अमानवीय यातना और बर्बरता का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। किरनापुर थाना पुलिस पर चोरी का झूठा जुर्म कबूल करवाने के लिए एक दंपती को थाने में बंद कर बेल्ट और डंडों से बेरहमी से पीटने का गंभीर आरोप लगा है। अमानवीयता की हद तब पार हो गई जब पुलिसकर्मियों ने दो माह की गर्भवती महिला के साथ भी हैवानियत की। सोमवार को जब परिजन अधमरी हालत में कराह रही पीड़िता को खाट (चारपाई) पर लिटाकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी आदित्य मिश्रा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उपनिरीक्षक (SI) समेत चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
घटनाक्रम के अनुसार, 21 अगस्त को किरनापुर पोस्ट ऑफिस में पालडोंगरी के नागुटोला निवासी शीला कारमेगे और अलका गिरिया के साथ उठाईगीरी हुई थी, जहां अलका के बैग से किसी अज्ञात ने 50 हजार रुपये पार कर दिए थे। पीड़िता की शिकायत पर जांच कर रही किरनापुर पुलिस ने महज एक संदिग्ध के मौखिक बयान पर ग्राम टिमकीटोला निवासी कैलाश चौधरी और उसकी दो माह की गर्भवती पत्नी सावित्री चौधरी (30 वर्ष) को 2 सितंबर को घर से उठा लिया। परिजनों का दावा है कि घटना के वक्त कैलाश मवेशी चरा रहा था और सावित्री घर पर सिलाई का काम कर रही थी।
कैलाश चौधरी के पूर्व सैनिक रिश्तेदार तोमेश्वर राहंगडाले और परिजनों ने कलेक्टर व एसपी से लिखित शिकायत कर बताया कि 2 सितंबर की रात दोनों पति-पत्नी को थाने के अलग-अलग कमरों में बंद किया गया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने चोरी स्वीकार कराने के लिए दोनों के कपड़े उतरवाए और चौड़े बेल्ट व लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा।
पीड़िता दो माह की गर्भवती है, इसके बावजूद उसके निजी और नाजुक अंगों पर चोटें पहुंचाई गईं, जिससे दोनों थाने में ही बेहोश हो गए। 3 सितंबर की शाम पुलिस ने उन्हें जबरन जुर्म कबूलने का दबाव बनाकर और किसी से शिकायत करने पर गांव से बाहर करने की धमकी देकर छोड़ा। घर पहुंचने के बाद से ही महिला की स्थिति नाजुक बनी हुई थी।
सोमवार को पूर्व सैनिक और परिजनों ने जब कराहती हुई महिला को सीधे कलेक्ट्रेट परिसर में खाट पर लाकर रखा, तो अफरा-तफरी मच गई। डिप्टी कलेक्टर राहुल नायक ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और तत्काल एम्बुलेंस से महिला को जिला अस्पताल भिजवाया।
सूचना मिलते ही पहुंचे पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने मामले में बिना देरी किए सख्त कदम उठाए:
चार पुलिसकर्मी निलंबित: उपनिरीक्षक दामेन्द्र तुरकर, प्रधान आरक्षक आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) अटैच कर दिया गया।
महिला एसआईटी का गठन: मामले की निष्पक्ष जांच के लिए डीएसपी प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में 4 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो दो सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
परिजनों ने मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने, झूठे आरोपों से मुक्ति और उचित मुआवजे की मांग की है। मामले की शिकायत राष्ट्रीय एवं राज्य महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है।
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