Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

बालाघाट धान घोटाला: EOW की बड़ी कार्रवाई, सरकारी धान की हेराफेरी में मार्कफेड अधिकारियों और मिल मालिकों पर FIR

बालाघाट: मध्यप्रदेश के बालाघाट में सरकारी धान की कस्टम मिलिंग के नाम पर करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने जांच के बाद मार्कफेड और एमपी स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन के कई अधिकारियों सहित सचदेव राइस मिल के संचालकों को आरोपी बनाया है। यह पूरा खुलासा तब हुआ जब परिवहन विभाग ने महाराष्ट्र सीमा पर ओवरलोड ट्रकों का चालान काटा, जिससे अवैध रूप से ले जाया जा रहा सरकारी धान पकड़ में आ गया।

कैसे हुआ खुलाशा: एक चालान ने खोली भ्रष्टाचार की पोल

घोटाले का पर्दाफाश 2 अप्रैल 2024 को हुआ, जब सचदेव राइस मिल से सरकारी धान लेकर दो ट्रक अवैध रूप से महाराष्ट्र की ओर जा रहे थे। रजेगांव स्थित अंतरराज्यीय चेक पोस्ट पर परिवहन विभाग ने एक ट्रक को ओवरलोड पाया और 12 हजार रुपये का चालान काटा। जांच में इन ट्रकों के पास परसवाड़ा कैप से धान लाने का गेटपास मिला, जबकि वे मिल जाने के बजाय महाराष्ट्र की सीमा पार कर रहे थे। मिल संचालक समीर सचदेव ने बहाना बनाया कि ड्राइवर को नींद आने के कारण ट्रक गलती से बॉर्डर पर पहुंच गए। मार्कफेड के अधिकारियों ने उस समय मात्र 25-25 हजार का जुर्माना लगाकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की थी।

फर्जी अनुबंध और क्षमता का खेल

EOW की जांच में सामने आया कि सचदेव राइस मिल की वास्तविक क्षमता 4 मीट्रिक टन प्रति घंटा थी, लेकिन मार्कफेड के अधिकारियों ने मिलीभगत कर इसे दस्तावेजों में 6 मीट्रिक टन प्रति घंटा दर्शाया।

  • षडयंत्र: तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी हिरेन्द्र सिंह रघुवंशी ने बिना सत्यापन और निरीक्षण के अनुबंध किया।

  • अनियमितता: उनके बाद आए विवेक तिवारी ने भी इसी फर्जी क्षमता के आधार पर मिल मालिक को 36 लॉट धान का अतिरिक्त काम दे दिया।

  • फर्जीवाड़ा: जांच में यह भी पता चला कि मिल मालिक प्रकाश सचदेव ने अपने बेटे समीर को महज 100 रुपये के स्टांप पर मिल किराए पर दी थी और एक ही बिजली कनेक्शन से दो अलग-अलग मिलें संचालित की जा रही थीं।

इन अधिकारियों और संचालकों पर गिरी गाज

EOW ने इस योजनाबद्ध हेराफेरी के लिए कुल 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों की सूची में शामिल हैं:

  1. अभिषेक निषाद: तत्कालीन उप प्रबंधक (वित्त), मार्कफेड।

  2. हिरेन्द्र सिंह रघुवंशी: तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी, मार्कफेड।

  3. विवेक तिवारी: वर्तमान जिला विपणन अधिकारी, मार्कफेड।

  4. हरीश कौरी: उप प्रबंधक (वित्त), मार्कफेड।

  5. पीयूष माली: तत्कालीन जिला प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति निगम।

  6. दुर्गेश बैस: लेखापाल, नागरिक आपूर्ति निगम।

  7. प्रकाश सचदेव और समीर सचदेव: राइस मिल प्रोप्राइटर और संचालक।

सरकार को करोड़ों की आर्थिक क्षति

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के अनुसार, अधिकारियों और राइस मिल संचालकों की इस सांठगांठ ने सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है। ट्रकों के दस्तावेजों में हेराफेरी और मिल की क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना इस बात का प्रमाण है कि यह भ्रष्टाचार लंबे समय से सुनियोजित तरीके से चल रहा था। EOW अब इस मामले में अन्य राइस मिलों और अधिकारियों की संलिप्तता की भी गहराई से जांच कर रही है।

Share:

Leave A Reviews

Related News