Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

बांग्लादेश को भाजपा की बंगाल जीत से रिश्तों में नए दौर की उम्मीद, तीस्ता समझौते पर बढ़ी आस


ढाका, 13 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बड़ी जीत सिर्फ पूर्वी भारत की राजनीति और शासन को ही नहीं बदल सकती, बल्कि भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भी एक नया और ज्यादा सकारात्मक दौर शुरू कर सकती है। ढाका के स्थानीय मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा हो रही है।

ढाका, 13 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बड़ी जीत सिर्फ पूर्वी भारत की राजनीति और शासन को ही नहीं बदल सकती, बल्कि भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भी एक नया और ज्यादा सकारात्मक दौर शुरू कर सकती है। ढाका के स्थानीय मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा हो रही है।

बांग्लादेश के अखबार 'ढाका ट्रिब्यून' के एक संपादकीय के मुताबिक, भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से दक्षिण एशिया की सबसे मजबूत और सफल साझेदारियों में से एक रही है। सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों ने मिलकर काम किया है, जो व्यावहारिक कूटनीति का एक अच्छा उदाहरण माना जाता है।

हालांकि, कुछ पुराने और अनसुलझे मुद्दों की वजह से समय-समय पर रिश्तों में तनाव भी आया है। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा तीस्ता नदी के पानी बंटवारे का समझौता है, जो लंबे समय से अटका हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब कोलकाता में भाजपा की सरकार बनने और केंद्र में पहले से एनडीए की सरकार होने से इन पुराने मुद्दों को ज्यादा तालमेल और तेजी के साथ हल करने का अच्छा मौका मिल सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया कि तीस्ता नदी हिमालय से निकलती है, फिर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में जाती है। बांग्लादेश के उत्तरी इलाकों में लाखों किसान इसकी पानी पर निर्भर हैं।

भारत और बांग्लादेश 2011 में पानी बंटवारे के समझौते के काफी करीब पहुंच गए थे, लेकिन उस समय पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ने स्थानीय पानी की जरूरतों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई थी, जिसके कारण समझौता नहीं हो पाया।

तब से तीस्ता का मुद्दा दोनों देशों के अच्छे रिश्तों के बीच अधूरे काम की तरह देखा जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत से राज्य और केंद्र दोनों जगह एक ही राजनीतिक नेतृत्व होने की स्थिति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच पुराने मुद्दों को सुलझाने और रिश्तों को और मजबूत करने का मौका मिल सकता है।

संपादकीय में कहा गया, “अगर तीस्ता और बाकी लंबित मुद्दों पर प्रगति होती है तो यह सिर्फ पुराने विवादों का समाधान नहीं होगा, बल्कि दक्षिण एशिया के सबसे अहम रिश्तों में से एक को और मजबूत करेगा। इतिहास, भूगोल और साझा सपनों से जुड़े इन दो देशों के लिए यह एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है, ऐसा दौर जो भरोसे, सहयोग और साझा समृद्धि पर आधारित होगा।”

इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का हाई कमिश्नर बनाए जाने को भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे यह संदेश जाता है कि नई दिल्ली इस अहम पड़ोसी रिश्ते में नई राजनीतिक ऊर्जा लाना चाहती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल की राजनीति और बांग्लादेश के साथ सांस्कृतिक रिश्तों की त्रिवेदी की समझ दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, खासकर तब जब दोनों देश पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर साझा अवसरों पर ध्यान देना चाहते हैं।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

Share:

Leave A Reviews

Related News