
जबलपुर. मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बरगी बांध (Bargi Dam) में हुए क्रूज हादसे की जांच कर रहे एकल सदस्यीय जांच आयोग ने मामले में एक बेहद गंभीर और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संजय द्विवेदी (Justice Sanjay Dwivedi) के जांच आयोग के समक्ष हुई सुनवाई में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को जांच पूरी होने से पहले ही नष्ट कर दिया गया।
इस पर सख्त रुख अपनाते हुए जस्टिस द्विवेदी ने कहा कि देश के कानून यानी 'इंडियन वेसल्स एक्ट 2021' (Indian Vessels Act 2021) में ऐसा कहीं भी उल्लेख नहीं है कि किसी दुर्घटनाग्रस्त क्रूज या बोट को जांच से पूर्व नष्ट किया जाए। यहां तक कि जिला प्रशासन के पास भी ऐसा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर द्वारा दायर की गई इस जनहित याचिका पर जांच कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी के समक्ष कलेक्टर कार्यालय के कमरा नंबर 43 में विस्तृत सुनवाई हुई। मंच की ओर से प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे और एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया ने आयोग के सामने उपस्थित होकर मजबूती से अपना पक्ष रखा।
याचिकाकर्ताओं की दलीलों को गंभीरता से सुनने के बाद जस्टिस द्विवेदी ने एक औपचारिक आदेश पारित किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा उठाए गए सभी तकनीकी और कानूनी बिंदुओं को इस न्यायिक जांच में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। साथ ही, मंच को आगामी जांच के दौरान अपनी बात रखने के लिए दोबारा सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।
मंच द्वारा दायर याचिका में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के एक पुराने और बेहद स्पष्ट आदेश का हवाला देते हुए क्रूज संचालकों और पर्यटन विभाग को कटघरे में खड़ा किया गया:
कम क्षमता का इंजन: एनजीटी ने 12 सितंबर 2023 को अपने आदेश में साफ कहा था कि जलाशय में चलने वाले क्रूज में पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से 'फोर-स्ट्रोक' इंजन होना अनिवार्य है। लेकिन बरगी बांध में दुर्घटनाग्रस्त हुए क्रूज में मात्र 100 एचपी (HP) का बेहद कमजोर इंजन लगाया गया था, और सफर के दौरान उसका दूसरा बैकअप इंजन भी पूरी तरह फेल हो गया था।
सर्टिफिकेट का अभाव: क्रूज संचालकों के पास पर्यावरण नियमों (Environmental Norms) के पालन से जुड़ा कोई वैध प्रमाणपत्र या फिटनेस डॉक्युमेंट नहीं था।
याचिकाकर्ताओं ने सबसे बड़ा कानूनी सवाल उठाते हुए कहा कि एनजीटी के आदेश के पैरा 132 के मुताबिक किसी भी बोट या क्रूज के यात्रियों को सफर कराने से पहले उसकी 'फिटनेस' पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
मंच के प्रतिनिधियों ने आयोग से पूछा कि जब जिला प्रशासन या संचालकों ने साक्ष्यों को छुपाने के उद्देश्य से दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को पहले ही नष्ट (Destroy) कर दिया है, तो अब फॉरेंसिक और तकनीकी टीमें उसकी फिटनेस, इंजन की क्षमता और दुर्घटना के असली कारणों की जांच आखिर कैसे करेंगी?
इस गंभीर बिंदु पर जांच आयोग ने भी गहरी चिंता व्यक्त की। जस्टिस संजय द्विवेदी ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे इस पूरे मामले और क्रूज को नष्ट किए जाने से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज और सबूत अगली सुनवाई तक आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा सके।
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