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भारत 25-26 जून 2026 को 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक की करेगा मेजबानी


नई दिल्ली, 21 जून (आईएएनएस)। भारत 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 25-26 जून 2026 को गुरुग्राम, हरियाणा में 11 वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और नवाचार पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी एक साथ आएंगे। यह जानकारी विद्युत मंत्रालय द्वारा रविवार को दी गई।

नई दिल्ली, 21 जून (आईएएनएस)। भारत 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 25-26 जून 2026 को गुरुग्राम, हरियाणा में 11 वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और नवाचार पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी एक साथ आएंगे। यह जानकारी विद्युत मंत्रालय द्वारा रविवार को दी गई।

भारत की यह चौथी ब्रिक्स अध्यक्षता है, इससे पहले वह 2012, 2016 और 2021 में भी इस अध्यक्षता का हिस्सा रह चुका है।

मंत्रालय ने कहा कि 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण (ब्रिक्स)" के व्यापक विषय द्वारा निर्देशित है। ऊर्जा ट्रैक के अंतर्गत, भारत ने " सर्वेषां ऊर्जम् " (सभी के लिए ऊर्जा) विषय को अपनाया है, जो सार्वभौमिक ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आज ब्रिक्स में 11 देश शामिल हैं - ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात, ये सभी देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया भर के देश जलवायु परिवर्तन, तकनीकी बदलाव और बढ़ती ऊर्जा मांग की चुनौतियों से निपटते हुए ऊर्जा सुरक्षा, किफायती दाम और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

मंत्रालय ने कहा कि ब्रिक्स ऊर्जा एजेंडा की प्राथमिकताएं भारत के सतत विकास के रास्ते से काफी मेल खाती हैं। भारत का यह रास्ता बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने, ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा तक पहुंच को बेहतर बनाने, ग्रिड की मजबूती बढ़ाने, सप्लाई के स्रोतों में विविधता लाने और अपने ऊर्जा मिश्रण में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने पर केंद्रित है।

मंत्रालय के मुताबिक, विश्व में बिजली के तीसरे सबसे बड़े उत्पादक और उपभोक्ता होने के साथ-साथ सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के नाते, भारत सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा को अपने विकसित भारत 2047 विजन का एक आधारशिला मानता है। यह बैठक भारत को एक सतत और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा प्रणाली के निर्माण में हुई अपनी महत्वपूर्ण प्रगति को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगी।

पिछले एक दशक में, भारत ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता को 50 गुना से अधिक बढ़ाया है, 6 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए हैं और 2032 तक 410 गीगावाट घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

--आईएएनएस

एबीएस

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