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भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ केस में पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर, स्वतंत्र जांच की मांग


पटना, 22 जून (आईएएनएस)। बिहार के भोजपुर जिले में कथित पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर विवाद और गहरा गया है। पटना हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

पटना, 22 जून (आईएएनएस)। बिहार के भोजपुर जिले में कथित पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर विवाद और गहरा गया है। पटना हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

वकील मुकेश कुमार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर निष्पक्ष जांच और मुठभेड़ के लिए जिम्मेदार पाए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

याचिकाकर्ता ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया है।

जनहित याचिका में भरत भूषण तिवारी की मौत के कारणों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

याचिका के अनुसार, मुठभेड़ से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें भरत तिवारी पिस्तौल लिए हुए दिखाई दे रहे थे।

याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि अगर वह वाकई हथियारबंद था, तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया या हथियार जब्त क्यों नहीं किया।

भरत भूषण तिवारी के परिवार ने लगातार आरोप लगाया है कि मुठभेड़ फर्जी थी। उनके अनुसार, घटना के समय वह आत्मसमर्पण कर चुका था और निहत्था था।

परिवार ने विरोध प्रदर्शनों के बाद मृतक के पिता, भाई और कई ग्रामीणों के खिलाफ पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने पर भी आपत्ति जताई है।

भोजपुर पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी ने ऑपरेशन के दौरान पुलिस टीम पर 10 से 12 गोलियां चलाईं। पुलिस के अनुसार, अधिकारियों ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसके परिणामस्वरूप वह घायल हो गया।

घायल भरत को पहले आरा सदर अस्पताल ले जाया गया और बाद में पटना के पीएमसीएच रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। बिहार सरकार ने घटना की न्यायिक जांच की घोषणा कर दी है। जांच एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट के जज द्वारा किए जाने की उम्मीद है।

हालांकि, याचिकाकर्ता ने बताया है कि सरकार द्वारा न्यायिक जांच की घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन जांच से संबंधित औपचारिक अधिसूचना अभी तक जारी नहीं की गई है। प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई के तहत, इस मामले में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।

खबरों के अनुसार, शाहपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को भी निलंबित कर दिया गया है।

जनहित याचिका में पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा की मांग की गई है और दोषी पाए जाने पर जवाबदेही तय करने की बात कही गई है।

इस घटना के बाद बिहार के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। गोपालगंज में सैकड़ों नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने पोस्ट ऑफिस चौक से थाना चौक तक कैंडल मार्च निकाला।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मुठभेड़ में कानूनी प्रक्रियाओं और मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है। कई प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि भरत तिवारी ने गोलीबारी से पहले आत्मसमर्पण कर दिया था और इस घटना को सुनियोजित हत्या बताया।

कैमूर जिले में भी विरोध प्रदर्शन हुए, जहां राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने भभुआ नगर पालिका मैदान से एकता चौक तक आक्रोश मार्च निकाला।

प्रदर्शन के दौरान, नेताओं ने दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की।

--आईएएनएस

एमएस/

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