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भारत के पास किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार है: सरकार


नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। सरकार ने सोमवार को बताया कि देश के किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत में पर्याप्त उर्वरक भंडार उपलब्ध है। कृषि मंत्रालय द्वारा वर्ष 2026 के पूरे खरीफ सीजन के लिए अनुमानित कुल आवश्यकता 383.9 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) के मुकाबले वर्तमान में देश का भंडार लगभग 195.79 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) है।

नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। सरकार ने सोमवार को बताया कि देश के किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत में पर्याप्त उर्वरक भंडार उपलब्ध है। कृषि मंत्रालय द्वारा वर्ष 2026 के पूरे खरीफ सीजन के लिए अनुमानित कुल आवश्यकता 383.9 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) के मुकाबले वर्तमान में देश का भंडार लगभग 195.79 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) है।

उर्वरक विभाग द्वारा जारी एक अपडेट के अनुसार, यह 51 प्रतिशत से अधिक की अभूतपूर्व अग्रिम उपलब्धता को दर्शाता है, जो 33 प्रतिशत के पारंपरिक बफर मानक से कहीं अधिक है।

विभाग ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बाद किसानों के लिए पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करने के लिए भारत ने आयात और घरेलू उत्पादन में वृद्धि के माध्यम से लगभग 163.01 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) उर्वरक का भंडार जोड़ा है।

मौजूदा संकट के दौर में भारत ने 50 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और फास्फोरस एवं पोटेशियम उर्वरक सुरक्षित कर लिए हैं। बयान में कहा गया है कि विदेशों में स्थित 28 मिशनों के समन्वय से भारत ने ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड से यूरिया की आपूर्ति और रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से लाल सागर मार्ग के माध्यम से एनपीके उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित की है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्याप्त यातायात से बचा जा सके।

जून में भारतीय बंदरगाहों पर आयातित यूरिया, एनपीके और एनपीके उर्वरक का भंडार 25 लाख मीट्रिक टन से अधिक होने की उम्मीद है। बयान में यह भी कहा गया है कि भारत ने 17 लाख मीट्रिक टन यूरिया की खरीद के लिए वैश्विक निविदा जारी की है, जिस पर काम जारी है।

उर्वरकों, अर्थात् यूरिया और फास्फोरस एवं पोटेशियम उर्वरकों के उत्पादन के लिए आवश्यक सामग्रियों की उपलब्धता की समीक्षा उर्वरक विभाग द्वारा नियमित रूप से की जा रही है।

विभाग नियमित रूप से कंपनियों द्वारा साप्ताहिक आधार पर जारी किए गए सभी सब्सिडी बिलों का भुगतान कर रहा है, और वर्तमान में उर्वरक सब्सिडी के भुगतान के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध है।

जबकि यूरिया का वैश्विक बाजार मूल्य 4,100 रुपए प्रति बोरी से अधिक है, भारतीय किसानों को 45 किलो की बोरी केवल 266.5 रुपए की भारी सब्सिडी वाली कीमत पर मिल रही है। इसी तरह, डीएपी के मामले में, 50 किलो की बोरी का वैश्विक मूल्य 5,000 रुपए से अधिक होने के बावजूद, यह उर्वरक भारतीय किसानों को मात्र 1,350 रुपए प्रति बोरी में उपलब्ध कराया जा रहा है।

बयान में आगे कहा गया है कि भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत, स्थिर और सुव्यवस्थित बनी हुई है, और सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता लगातार आवश्यकता से अधिक है।

--आईएएनएस

एमएस/

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