नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करते हुए एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। तटरक्षक बल ने 23 सितंबर को स्वदेश में निर्मित समुद्री पोत को अपने बेड़े में शामिल किया है। यह एयर कुशन व्हीकल एसीवी एच-562 है।
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नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करते हुए एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। तटरक्षक बल ने 23 सितंबर को स्वदेश में निर्मित समुद्री पोत को अपने बेड़े में शामिल किया है। यह एयर कुशन व्हीकल एसीवी एच-562 है।
तटरक्षक बल के मुताबिक, यह भारत में स्वदेशी रूप से निर्मित दूसरा एयर कुशन व्हीकल है। एयर कुशन व्हीकल के शामिल होने से तटरक्षक बल की समुद्री तैयारियों को और मजबूती मिलेगी। यह पोत तटरक्षक बल की समुद्री क्षेत्र में पहुंच और अभियान क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। खास तौर पर ऐसे क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता महत्वपूर्ण होगी, जहां सामान्य पोतों के लिए पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एसीवी एच-562 का डिजाइन और निर्माण भारत में ही किया गया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका तटरक्षक बल में शामिल होना देश की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को भी दर्शाता है। इससे समुद्री सुरक्षा के लिए जरूरी प्लेटफॉर्म के निर्माण में घरेलू क्षमता को बढ़ावा मिलता है। गौरतलब है कि भारतीय तटरक्षक बल लगातार अपनी निगरानी और समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत कर रहा है। नए स्वदेशी प्लेटफॉर्म इस प्रयास का अहम हिस्सा हैं।
एसीवी एच-562 के शामिल होने से तटरक्षक बल की परिचालन पहुंच और समुद्री क्षेत्र में तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता को और बल मिलेगा। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। देश में डिजाइन और निर्मित प्लेटफॉर्म को तटरक्षक बेड़े में शामिल करना भारत की स्वदेशी रक्षा और समुद्री निर्माण क्षमता को आगे बढ़ाता है।
गौरतलब है कि बीते दिनों नई दिल्ली में तटरक्षक बल की कमांडर्स कांफ्रेंस हुई थी। कमांडर्स कांफ्रेंस के दौरान समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर मंथन किया गया। बैठक में तटरक्षक बल की ऑपरेशनल तैयारी, क्षमता विकास, बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और स्वदेशीकरण से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया था। यह सम्मेलन भारतीय तटरक्षक बल का सर्वोच्च वार्षिक पेशेवर मंच होता है। इसमें देशभर से तटरक्षक बल के वरिष्ठ कमांडर शामिल हुए थे।
तीन दिवसीय सम्मेलन में रणनीतिक, ऑपरेशनल व प्रशासनिक प्राथमिकताओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन में तटरक्षक बल की मौजूदा तैयारियों की समीक्षा के साथ भविष्य की आवश्यकताओं पर भी विचार किया गया। चर्चा में स्वदेशी तकनीक और उपकरणों को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि तटरक्षक बल अपनी परिचालन जरूरतों को देश में विकसित क्षमताओं के माध्यम से पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सके।
--आईएएनएस
जीसीबी/एसके
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