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भारत-नेपाल को मिलकर बनानी होगी बाढ़ प्रबंधन की एकीकृत योजना: संजय झा


पटना, 27 अगस्त (आईएएनएस)। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड की स्थिति को भारत और नेपाल के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत बताते हुए दोनों देशों से संयुक्त रूप से बाढ़ प्रबंधन की दीर्घकालिक और एकीकृत योजना बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि नेपाल में होने वाली ऐसी घटनाओं का सीधा असर बिहार पर पड़ता है, इसलिए इसे अलग-अलग करके देखने के बजाय साझा रणनीति के साथ काम करने की जरूरत है।

पटना, 27 अगस्त (आईएएनएस)। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड की स्थिति को भारत और नेपाल के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत बताते हुए दोनों देशों से संयुक्त रूप से बाढ़ प्रबंधन की दीर्घकालिक और एकीकृत योजना बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि नेपाल में होने वाली ऐसी घटनाओं का सीधा असर बिहार पर पड़ता है, इसलिए इसे अलग-अलग करके देखने के बजाय साझा रणनीति के साथ काम करने की जरूरत है।

संजय झा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फिलहाल जो बाढ़ आई है, वह बिहार से करीब 200-250 किलोमीटर दूर नेपाल के तिब्बत से लगे हिस्से में आई है। अभी तक की जानकारी के अनुसार वहां पानी का बहाव काफी कम हो गया है और स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि गंडक नदी में भी पानी का स्तर एक लाख क्यूसेक से नीचे आ गया है, इसलिए फिलहाल बिहार में बहुत बड़ी आपातकालीन स्थिति नहीं दिख रही है, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत बनी हुई है।

उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब एक संदेश है। अब भारत और नेपाल को संयुक्त रूप से बाढ़ प्रबंधन की योजना बनानी चाहिए।" संजय झा ने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से नेपाल में ऊंचे बांध के निर्माण सहित विभिन्न उपायों पर चर्चा होती रही है। उन्होंने कहा कि नेपाल में आने वाली बाढ़ भारत, खासकर बिहार के लिए भी समस्या बनती है। इसलिए दोनों देशों को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन की योजना तैयार करनी चाहिए।

संजय झा ने नदियों की जल वहन क्षमता कम होने को भी बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि गाद जमा होने के कारण नदियों की पानी ले जाने की क्षमता लगातार कम हुई है। गंडक, कोसी, कमला और बागमती जैसी नदियां गंगा में मिलती हैं और इन सभी की जल वहन क्षमता प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि खुद गंगा की क्षमता भी कम हुई है। ऐसे में सिल्ट प्रबंधन नीति के तहत ठोस रास्ता निकालना जरूरी है, ताकि नदियों का पानी तेजी से आगे निकल सके।

उन्होंने कहा कि नेपाल में हुई घटना भविष्य के लिए चेतावनी भी है। ग्लेशियर टूटने या अचानक अत्यधिक बारिश होने की स्थिति में कुछ ही समय में फ्लैश फ्लड आ सकती है। ऐसी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाना भी बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि सामान्य मानसूनी बारिश का पूर्वानुमान तो लगाया जाता है, लेकिन अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाओं का समय रहते सटीक आकलन करना अभी भी कठिन है।

नेपाल में हुई तबाही पर दुख जताते हुए संजय झा ने मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ भारत से गए पर्यटक भी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना से सबक लेते हुए भविष्य के लिए भारत और नेपाल को मिलकर स्थायी और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था तैयार करनी चाहिए। बिहार की मौजूदा स्थिति पर उन्होंने कहा कि अभी तत्काल किसी बड़ी आपातकालीन स्थिति के संकेत नहीं हैं, लेकिन प्रशासन और आम लोगों को पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी

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